Saturday, May 23, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से आनंद कुमार त्रिवेदी की रचना

रचनाकारः-आनंद कुमार त्रिवेदी 
जिलाः-रायगढ़
शीर्षक ः- "भयाक्रान्त "
विधाः- छंदमुक्त

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भयाक्रांत सारा जग ,
      कोरोना महामारी से,
जैसे कंस डरा हुआ,
     किशन कन्हैया से।

उठते बैठते सोते,
     जागते हर बखत,
भय एक व्यापे है,
      अदृश्य बर्रैया से।।

कब कहाँ किसको है,
    मार देगा निज डंक,
आते मन खयाल ही,
    देह सिहरता है ।

हर एक आगंतुक ,
     शक के निगाह में है,
इंसान-इंसान को है,
     देख के डरता है ।।

बार-बार हाथ पैर,
    साबुन से है धो रहा,
पता नहीं विषाणु ये,
     बाट कहाँ जोहता।

खौफ का मंजर ऐसा,
    दरो और दीवारों पे,
लिये हाथ निज लेंस,
    दुश्मन को खोजता ।।

डर है जरुरी आज,
    रखना है सावधानी,
घर से निकलते ही,
    खो न जाए जिंदगानी।

भय बिन न हो प्रीत,
   कहते दास तुलसी,
इसीलिये डरो प्यारे !
   करो न मनमानी ।।

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व्याख्या ---विश्वव्यापी कोरोना महामारी से यद्यपि डरने की जरुरत नहीं सावधानी पूर्वक लड़ने की जरुरत है।तथापि यह सत्य है कि पूरे विश्व में इसका खौफ हर व्यक्ति के मन में समाया है।एक पहलु से यह आवश्यक भी है क्योंकि भय न होने से हम लापरवाह हो जाते हैं और नियमों को ताक में रख देते हैं।उक्त कविता में यही बात कही गयी है।

आनंद कुमार त्रिवेदी"आनंद"

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