Wednesday, May 13, 2020

छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव से रश्मि विपिन अग्निहोत्री की रचना- वृद्धाश्रम

कवयित्री- रश्मि विपिन अग्निहोत्री
जिला - कोण्डा़गांव,छत्तीसगढ़
शीर्षक- बंद करा दो वृद्धाश्रम सारे 
विधा - छंद मुक्त, काव्य 

*बंद करा दो वृद्धाश्रम सारे!*

डगमगाते कदम जो थाम ले वो माँ है। 
बिना कहे सब जो जान ले वो माँ है।। 

हमारे नखरे जो उठा ले वो माँ है।
दुआओं से जो बला टाले वो माँ है।। 

भूखे सोती कई बार जो वो माँ है। 
दुख में सहारा देती जो वो माँ है।। 

आँसू छुपाकर रखती जो वो माँ है। 
हिम्मत हमारी बंधाती जो वो माँ है।। 
 
हमारे लिए सहती सब जो वो माँ है।
बड़े- बड़े त्याग करती जो वो माँ है।। 

संसार में लाकर  जीवन हमें दिया। 
हमारे लिए सब सुख त्याग दिया ।। 

दुखी रहकर सुख की लोरी सुनाती। 
हमारी आंँखों से देखती संसार सारा।। 

हमारे होठों से सदा जो मुस्कुराती। 
हमारी खुशियों में जो गुनगुनाती।। 

जब  सारी दुनिया साथ छोड़ दे हमारा। 
अड़कर खड़ी संग  में जो वो माँ है।। 

कर्ज उसका चुकाना मुमकिन नहीं। 
बनो सहारा माँ के कंपते हाथों का ।। 

खुद खाने से पहले माँ को निवाला दो। 
ना अपनाओ पाश्चात्य संस्कृति देखो! 

माँ-पिता में भगवान की मूरत देखो! 
मंदिर में चाहे भगवान न रखो तुम ।। 

जब मना रहे सभी मातृ दिवस आज, 
तो वृद्धाश्रम में किसकी माँ आई है? 

लगाओ माँ का चलचित्र शिवालय में। 
बंद करा दो वृद्धाश्रम सारे " रश्मि "

      रश्मि विपिन अग्निहोत्री
     केशकाल जिला कोण्डा़गांव

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