केरला
अन्न अन्न पर उगाने वालों का ही नाम
9400232224
मैं मजबूत हूँ मज़दूर हूँ၊
अन्न अन्न पर तू क्या समझता है?
भोजन का स्वाद,
तुम्हारी माँ का प्यार,
अपने आलीशान बंगाल की कीमत,
तू पहले कपड़ों का सुगन्घ,
तुम्हारा पारिश्रम का फल
तुम्हारा फरेब, तुम्हारी धोखा
तुम्हारी आसा
आकाश के नीचे स्वयं ही भाव का घमण्ड
तुम्हारे भुजाओं का ताकत,
कल को बनाये रखने की प्रतीक्षा,
सब तुम्हारी सोच में,,,
जनाब अन्न अन्न पर तू क्या
समझता है?
अन्न अन्न पर अर्थात
खाने वालों का नाम नहीं लिखा है၊
वो खुदा ने जो सृष्टि की पैगम्बर है၊
वो किसी ओर का नहीं,
अन्न अन्न पर खाने वालों का नाम नहीं,
बल्कि उगाने वालों का नाम लिखा है၊
किसान मदूदूरों का नाम लिखा है।
दीपक अनंत अंशुमान
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