राज्य- छत्तीसगढ़
शीर्षक-
*"गाँव हमारा न्यारा-न्यारा"*
कब तक झेलोगे बर्बादी, अब तो कुछ प्रतिकार करो।
चाँदी-सोना बहुत मिलेंगे, तुम श्रम से अधिकार करो।।
बहुत गरीबी औ बेकारी, जन है कारण, अजी नहीं
जनसंख्या तो बल है अपना,तुम इसको स्वीकार करो।
गाँव हमारा न्यारा-न्यारा, भरा हुआ भाई चारा
शहरी आकर अरे शिकारी, इनका नहीं शिकार करो।
शुद्ध हवा, पावन जल निर्मल, यही गाँव की थाती है
नहीं प्रदूषित करें कभी हम , जो हो सके सुधार करो।
स्वान, गिद्ध, शेरों का हमने, चलने दिया न राज कभी
गौ माता को पूजा, गौ पर अब मत अत्याचार करो।।
*सुरेश पैगवार*-
जाँजगीर, छत्तीसगढ़
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