Tuesday, May 26, 2020

छत्तीसगढ़ के कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- मृगनयनी

रचनाकार :- नलिनी बाजपेयी
विषय :- रति स्थायी भाव के 
साथ अनुप्रास अलंकार
 शीर्षक :- मृग नयनी
 जिला :- कांकेर


~ •°• *मृग नयनी* •°• ~

सरल,सरस्,सुकोमल,
    सरिता सी बहने लगी,
मृदु ,मंजुल,मृगनयनी 
    बलखाती चलने लगी।

चन्द्र सा आनन,
    कंवल- अधर मुस्कुराने  लगी,
कौतुक,कुंतल राशि कर बहु 
    केश विन्यास सजने लगी।



व्याख्या-इस कविता में श्रृंगार रस के साथ अनुप्रास अलंकार की छटा  दिखाई पड़ती।नायिका सरल रस से भरी नदी के समान बहने लगी।सुंदर हिरनी की आँखों वाली बल खाने लगी।चन्द्रमा के समान मुख और उसके होठों में मुस्कान भरी है।सुंदर केश विन्यास कर सजने लगी।

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