जिला-कांकेर
विधा-कविता
शीर्षक-नन्हीं बिटिया
मां तुम कितनी
अच्छी हो
इतना काम क्यों
करती हो
मुझे भी सीखा दो।
मैं आपका सारा
काम कर दूंगी।
नन्हीं -सी बिटिया
की मासुमियत
बड़े होने का एहसास
पल भर में गृहिणी,
डॉक्टर, नर्स, शिक्षक
सब्जी वाली का
अभिनय ।
लौटा देता है बचपन
के वो दिन, वो पल
जो जिंदगी के
केनवास पर उभर
आते हैं वे दृश्य,
जो झंझावातों की
तपिश से ओझल
और धुंधले हो
गये थे और खो
जाती हूं मैं
बचपन के झरोखे में।।
मीरा आर्ची चौहान
*व्याख्या*-
नन्हीं बिटिया की
बातें सुनकर मां का हृदय वात्सल्य से भर उठता है।वह अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए अतीत में खो जाती है
बच्ची की बाल सुलभ क्रीड़ा मन को भाव विभोर कर देती है।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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