कोरिया, छत्तीसगढ़
शीर्षक_मैं मजदूर हूं
मैं मजदूर हूं
थकता नहीं मैं
न कभी हारता
परिस्थितियां चाहे जैसी भी हो
कभी भी नहीं, मन को मारता
स्वयं में मैं गुरूर हूं
हां मैं मजदूर हूं।
मेहनत का मैं पर्याय
हो न्याय या अन्याय
नहीं डगमगाते, कदम ये मेरे
चाहे शाम हो या सवेरे
कर्म करता जरूर हूं
हां मैं मजदूर हूं।
लॉकडाउन में अभी
बहुत ही बेबस और लाचार हूं
फंस गया हूं कहीं
अभी तो बस बेकार हूं
काम से तो कोशों दूर हूं
हां मैं मजदूर हूं।
तारा पांडेय"मुक्तांशा"
जय जवान
ReplyDeleteशानदार रचना
ReplyDeleteBahoot hi badhiya
ReplyDeleteNice poetry
ReplyDeleteBahut sundar
ReplyDelete