Tuesday, May 5, 2020

छत्तीसगढ़ से तारा पांडेय"मुक्तांशा" की रचना- मजदूर

तारा पांडेय"मुक्तांशा"
कोरिया, छत्तीसगढ़
शीर्षक_मैं मजदूर हूं

मैं मजदूर हूं 

थकता नहीं मैं
न कभी हारता
परिस्थितियां चाहे जैसी भी हो
कभी भी नहीं, मन को मारता
स्वयं में मैं गुरूर हूं
हां मैं मजदूर हूं।


मेहनत का मैं पर्याय
हो न्याय या अन्याय
नहीं डगमगाते, कदम ये मेरे
चाहे शाम हो या सवेरे
कर्म करता जरूर हूं
हां मैं मजदूर हूं।

लॉकडाउन में अभी
बहुत ही बेबस और लाचार हूं
फंस गया हूं कहीं
अभी तो बस बेकार हूं
काम से तो कोशों दूर हूं
हां मैं मजदूर हूं।
 
      तारा पांडेय"मुक्तांशा"

5 comments:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...