Tuesday, May 5, 2020

16 साहित्यकारों द्वारा कोरोना विषय पर आधारित काव्य सृजन दिनांक ५ मई२०२०/ मंगलवार



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रचनाकार -जयरूप पटेल 
राज्य -राजस्थान 
शीर्षक -कोरोना (कोरोना के रक्षक )
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कोरोना के कहर से, 
दुनिया अब तो थर्राती हैं !
चाइना इटली फ़्रांस ईरान की, 
मौते सबको डराती हैं !
अमेरिका की हालत खस्ता, 
कैसी ये  महामारी हैं !
दुनिया पे तो राज करें, 
घर में उसकी लाचारी हैं !
ऐसा मंजर कभी ना देखा, 
पिछले कितने सालों में!
पिंजरे के पंछी आजाद हैं, 
मानव फॅसा हैं तालों में !
 
पुलिस वालों का करों शुक्रिया, 
जनता के वो रखवाले !
आप घरों में महफूज बैठे, 
अपनी ड्यूटी वो संभाले !
कितनी सुरक्षा करें हमारी, 
सच में वो हिम्मत वाले !
ख़ाकी वर्दी जिनको नसीब हैं, 
वो भी तो किस्मत वाले !

नर्सिंग कर्मी पैरामेडिकल, 
डॉक्टर देश की शान हैं !
दिल से पूछो इस आफत में, 
ये सब तो भगवान हैं !
अपनी जान की परवाह नहीं, 
गैरों की जान बचाते हैं !
मानवता की नेक राह का,  
शुभाशीष वो पाते हैं !

कोई काम गर सरकारी हो, 
कभी मना नहीं करते हैं !
संकट के सब काम करा लों, 
शिक्षक कभी ना डरते हैं !

बड़े बुजुर्गो जनता सबकी, 
तबियत हो हरी भरी !
मांस मदिरा त्यागो बंधु, 
बात सुनो अब खरी खरी !
पैसों का अहंकार ना हो, 
रहें दौलत सारी धरी धरी !
छोड़ के जो संसार गये, 
सारी माया उनकी यहीं पड़ी !
बरकत हो व्यापार में सबके, 
दिल को खोल के दान करों !
खाना खिलाकर किसी गरीब को, 
उसका तुम सम्मान करों !

ऊँचे महल सूने पड़ गये, 
बॉम्बे और दिल्ली में !
छोड़ शहर को गाँव चले सब, 
पुरखों की हवेली में !
गाँवो की मिट्टी की खुशबू, 
बड़ी सुहानी लगती हैं !
शीतल पवन मंद शुभ्र ध्वल अब, 
मस्त चाँदनी लगती हैं !
ओढ़ पीताम्बर कृष्ण चले ज्यूँ, 
भोर की लाली लगती हैं !
मेरे गाँव के हर घर में, 
अब तो खुशहाली लगती हैं 

कोरोना के कहर से, 
दुनिया अब तो थर्राती हैं!
चाइना इटली फ्रांस ईरान की, 
मौते सबको डराती हैं !!
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जयरूप पटेल, बाड़मेर (राज. )





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दयाराम धोरावत 
अ० आमली जालोर, राजस्थान
लेखनी
*कोरोना कहर* 

*चीन से चला कोरोना,इटली में पैर पसारे हैं,*
*यू एस ए में हाथ मारे,कई देशों में इनके नजारे हैं।*
*भारत में खौफ भारी,कोरोना सितमगर है,*
*नमस्कार सभी को,ये कोरोना कहर है।*

*जनता कर्फ्यु,शट डाउन,लॉक डाउन सब चन्द हैं,*
*कोरोना चक्र तोड़ने, पुरा भारत  बन्द है।*
*आना-जाना घुलना-मिलना, रुको थोड़े दिन बंद हैं,*
*घर बैठे करना भाई, कोरोना का प्रबन्ध है।*

*सर्दी जुकाम,गला दर्द,नाक से बहे पानी है,*
*तेज बुखार संग सुखी, खांसी इनकी निशानी है।*
*कोरोना को दूर भगाओ,मिलकर हमने ठानी हैं,*
*साबुन से हाथ धोओ,*
*गर्म पीना पानी है।*

*दिन-रात नर्स डॉक्टर,कोरोना का करें उपचार,*
*अधिकारी कर्मचारी सबको,सलाम हैं बारम्बार।*
*सावधानी रखो दूरी घर में,हम कहते हैं बार-बार,*
*सेनेटाइज कर,मास्क पहन, हाथ धोना हर बार।*

*रखो निच्छित दुरी सबसे,महामारी से बचाना है,* *नियमों का पालन करना, सबको समझाना हैं।*                   *हाथ जोड़ दयाराम कहे,कोरोना को भगाना है।*       *नमस्कार हैं सबको,कोरोना को मिटाना है।।*

स्वरचित
दयाराम धोरावत अ०, आमली




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नाम-दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश'
राज्य-पश्चिम बंगाल
विषय-कोरोना
“कोरोना वायरस"
कोरोना कोरोना कोरोना ओ कोरोना 
तुझसे अब हमें नहीं है डरना कोरोना
घर से बाहर अभी निकलना नहीं है 
कोरोना वायरस से इतना डरना नहीं है
जीवन ये अनमोल इसे सुरक्षित रखना है 
अपने बचकर परिवार को भी बचाना है
कोरोना वायरस है एक ऐसी महामारी 
जो आज मानवता पर पड़ रही है भारी 
गरम पानी का प्रयोग हरदम करते रहो 
नीम तुलसी गिलोय काली मिर्च का रस पीते रहो 
प्रेम से भी किसी से अभी हाथ  मिलाना नहीं
दूर से ही प्रणाम नमस्ते कह काम चलाना है 
दूरी बना के ही रहना है अभी कुछ दिन 
चला जायेगा कोरोना बाकी है कुछ दिन 
लॉक डाउन सुरक्षा ही सबसे सुंदर बचाव है
घर में ही रहने से कम होता कोरोना का प्रभाव है
दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश" कलकत्ता





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 रचनाकार का नाम - निहाल चन्द्र शिवहरे 
राज्य - उत्तर प्रदेश 
शीर्षक - कोरोना को हराओ , अपनी भूमिका निभाओ
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देवों का निवास जहाँ उस वसुधा पर कोरोना ने आँख है तरेरी
जननायक के आहृवान पर भारत में भी बज उठ अब रणभेरी शिवा और राणा की सन्तानें हम तलवार की धारों पै चलते हैं
अन्त करने शत्रुओं का भारतवंशियों के हाथ सदा मचलते हैं 
जिन सांपो से उत्पन्न हुआ ये वायरस वे शिव के  हैं कंठहार 
भक्तों की भक्ति से वशीभूत महादेव गरल पान को सदा तैयार 
शेषनागों की शैय्या पर सागर में लक्ष्मी संग विष्णु करें विहार
कालिन्दी में भी शेषनाग के फन पर होवे कन्हैया की जयकार
कलयुग के दानव से बचाने को जनता से कर्फ्यू की है दरकार
प्रणाम की परम्परा निभाये जग भारत की बोले जयजयकार
प्रेम का भाव रखो सबसे दूर से रहकर ही करो उनसे मनुहार
साबुन से हाथों का मैल मिटाकर सुरक्षित रखो अपना परिवार 
इटली ,चायना जैसे विनाश से भारत बचाओ रखोआपसी दूरी
जगत कल्याण में  अपनी भूमिका निभाने में क्या है मजबूरी 
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    निहाल चन्द्र शिवहरे




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 *रचनाकार का नाम*- रोहित कुमार गुप्ता
*राज्य* - महाराजगंज (उत्तर प्रदेश)
*शीर्षक* - निवेदन (कोरोना के कहर से बदल गया इंसान )

 *बदल गया है इंसान* 

बदल गया है इंसान
कितना बदल गया है इंसान,
बदल गयी है विश्व प्रकृति
बदल गयीं हैं धरती माता,
स्वच्छ सलीला हो गयीं नदियाँ
आसमान में पंछी स्वच्छंद उडता ,
गंगा मैली हो गयी थी खूब
अब उसका जल स्वच्छ हो गया,
आईनकानून से जो नहो पाया 
अब लाकडाउन ने उसे कर दिखाया।
सोचता था जो खुद को बलवान
आज बदल गया है वह इनसान।
अदृश्य वायरस ने अब सभी का
बदल दिया है गुण और कर्म ।
बन्दी बनकर अपने ही घर में
पडा रहा है चतुर इनसान ।
उसकी चतुराई अब पलट गयी
कोरोना के आतंक से वह म्रियमाण।
कितना बदल गया है इनसान ।
जाता था रोडपर सीनाताने वह
आज वही रोड पडा है सुनसान, नहीं रहा जब आदमी का डर
घूम रहे हैं रोडपर जंगली पशुगण ।
कितना बदल गया है इनसान ।
जरूरी है अब कोरोना से बचना सचमुच जीवन है बहु मूल्यवान ।
कोशिशें जारी हैं बचाने की जान
जरूर सफल होंगे इनसान ।
अब हमें करना है नियमों के पालन।
हे जगदीश्वर अब हम आपके शरण ।

               रोहित कुमार गुप्ता.....





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डा.साधना तोमर
  बागपत, उत्तर प्रदेश             
  शीर्षक -  कोरोना(गीतिका छन्द) 

मात जगजननी सुनो अब, 
 शक्ति  हमको  दीजिए। 
विश्व को संताप से अब, 
  मुक्त माता कीजिए। 
    
आज हम सब इस जहाँ में, 
    बहुत  ही मजबूर  हैं। 
मातृभूमि बिलख रही है, 
   आज  गम से चूर हैं। 
लाज रख लो मात सबकी, 
    स्नेह आंचल दीजिए। 

लीजिए अपनी शरण में, 
  छांव  ममता  दो  घनी। 
आज कोरोना मिटाकर, 
  विश्व को कर दो धनी। 
शीघ्र संकट दूर सब हो, 
भाव उज्ज्वल कीजिए। 

प्रेम  की   गंगा  बहाये, 
आज मिलकर के सभी। 
अवनि अम्बर हर्षित  हो, 
मलिन मन ना हो कभी। 
सीख माता इस जगत को
  आज   ऐसी   दीजिए। 

डा.साधना तोमर
बड़ौत (बागपत)







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 - रचनाकार का नाम -
        श्रीमती ज्योति जितेंद्र 
        सक्सेना
    ०२. राज्य - छत्तीसगढ़
    ०३. विषय - कोरोना
    ०४. शीर्षक - कोरोना और   
                      जीवन
  
शुक्र कर रब का, तू अपने घर में है,                                       पूछ उससे जो अटका सफ़र में है!  
यहां बाप की शक्ल नहीं देखी,  
आख़री वक़्त में कुछ लोगों ने !
बेटा हॉस्पिटल में और बाप कब्र में है                                 

तेरे घर में राशन है साल भर का,                                 तू उसका सोच जो दो वक्त की रोटी के फ़िक्र में है !   
तुम्हें किस बात की जल्दी है गाड़ी में घूमने की,   
अब तो सारी कायनात ही सब्र में है !                                   अभी भी अगर किसी भ्रम में मत  
रहना,इंसानों की नहीं सुनती ,
आज कल कुदरत अपने सुर में है ! ! !
     श्रीमती ज्योति जितेंद्र  
    सक्सेना,(बिलासपुर छ.ग.)
    






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 रचनाकार का नाम - इन्द्राणी साहू"साँची"
पता - भाटापारा (छत्तीसगढ़)
 विषय - कोरोना और देशभक्ति
 विधा -राधेश्यामी छंद (गीत)

रूप महामारी का धरकर , कोरोना जग हिला रही है ।
देश भक्ति दिखलाओ अब तो , धरती तुमको बुला रही है ।।

केवल कोरी बातें करना , सार नहीं है देश भक्ति की ।
पर सेवा हित अर्पित जीवन ,सार्थकता है तभी शक्ति की ।
रहो सुरक्षित करो सुरक्षित , व्याधि सबको सिखला रही है ।
देश भक्ति दिखलाओ अब तो , धरती तुमको बुला रही है ।।

जब तोड़ेंगे कड़ी तभी तो , रोक संक्रमण यह पाएँगे ।
घर में रक्षित रखें स्वयं को , बात यही हम समझाएँगे ।
सामाजिक दूरी अपनाओ , युक्ति उत्तम बतला रही है ।
देश भक्ति दिखलाओ अब तो , धरती तुमको बुला रही है ।।

देश बचाना हमें अगर तो , अनुशासन में रहना होगा ।
जन रक्षा हित थोड़ी पीड़ा , हम सब को भी सहना होगा ।
उन दुखियों के बनो सहायक , विपदा जिनको रुला रही है ।
देश भक्ति दिखलाओ अब तो , धरती तुमको बुला रही है ।।

शत शत नमन करो उनको जो , सेवक बन दिन रात अड़े हैं ।
मार भगाएँगे कोरोना , योद्धा सीना तान खड़े हैं ।
इनकी सच्ची सेवा ही तो , मनुजता को सहला रही है ।
देश भक्ति दिखलाओ अब तो , धरती तुमको बुला रही है ।।
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.नाम - इन्द्राणी साहू "साँची"
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नाम-रामचन्द्रस्वामी 
पता-अध्यापक बीकानेर, राजस्थान ।
कोरोना पर कविता 
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*रक्तबीज कोरोना*
=============
बाहर मंडराता *रक्तबीज कोरोना* का खतरा दु:खद है ।
घर ही बना है अब आसारा सुखद है ।।
बच्चों की मुस्कान सा,मंदिर सा लगता है अब घर धाम ।
घर में प्यार-दुलार है, सबकी सहमति से होते हैं सारे काम ।।
घर बैठे हैं खाली,काम धन्धे का है मीटर डाउन।
फैशन छूमंतर हो गया, फुल ड्यूटी है पाजामा और गाउन ।।
बंद हो गये सारे होटल मयखाने, ना कहीं चाट,ना कहीं मिठाई।
सब रूक गये सारे सैर सपाटे, बंद हो गई रेल-यात्रा हवाई।।
घर की दाल रोटी में रहो खुश,ये ही सबकी रसमलाई ।
सब खामोश हैं ये कैसी *रक्तबीज कोरोना* बीमारी आई
ना कोई इलाज, ना टीका, ना इसकी कोई दवाई ।
*रक्तबीज कोरोना* की महामारी दुनिया में कैसी आई।।
हाथों को धोयें बार बार, मुँह पर मास्क लगाना है ।
घर पर सुरक्षित रहकर,सोशल डिसटेन्स से कोरोना को भगाना है 
ना इलाज इस बीमारी ने सबको कर रखा है हैरान ।
*रक्तबीज कोरोना* का मचा हाहाकार पूरी दुनिया है परेशान ।
लाॅकडाउन में समझनी है जिदंगी तो पिछे देखो ।
जान है तो जहान है, जीनी है जिदंगी तो आगे देखो ।।

(रामचन्द्र स्वामी अध्यापक बीकानेर)






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नाम : आनन्द भूषण श्रीवास्तव
पता : गोगरी,खगड़िया ( बिहार )
कोरोना पर कुंडलियां :

कोरोना का दंश से,फफक रहा संसार।
जीवन दुर्लभ हो गया,उजड़ गया परिवार।
उजड़ गया परिवार,हम विवश और लाचार।
मिलेगी मुक्ति कैसे,मानव अब करे विचार।
आनन्द घर ही बैठिए,सेहत नहीं  खोना।
घातक घात करने को,बेताब  कोरोना।




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 नाम -शंकर दान चारण 
जोधपुर राजस्थान 
विषय -कोरोना 


भारत फ़िर से जितेगा  

इस विचित्र बिमारी से 
विश्व ने घुटने टेक दिये 
सब हार गये विपदा से 
विष सम सब गुंठ पिये 
भारत भू की बात अलग 
काला समय भी बितेगा 
हम एक हो गये तो 
भारत फ़िर से जितेगा

घर बैठे राष्ट्र सेवा का 
एसा अवसर नही मिलेगा 
जो घर के अंदर ही होगा 
वही सुखी जीवन जियेगा 
भारत माँ  का कर्ज चुका दो 
समय जल्द ही बीतेगा 
हम एक हो गये तो 
भारत फ़िर से जितेगा

एक बनो सब नेक बनो सब 
देश वासियो संकट भारी 
विश्व पटल पर दृष्टि करे तो 
चारों ओर बस हे लाचारी 
घर मे रहो सुरक्षित रहो 
कॉरोना नही जितेगा  
हम एक हो गये तो 
भारत फ़िर से जितेगा






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 _*रचनाकार का नाम- डा० रजनी धाकरे*_ 
राज्य- उत्तर प्रदेश 
शीर्षक - करोना 
डर तब तक ही  डर है
जब तक तुम डरो ना
जब समस्या सामने हो तो 
तब तुम उससे  डरो   ना  ।।
ना आने पर डरते  थे
कैसा होगा   करोना 
आ गया तो कुछ नियम करके 
इसको दूर तुम करो  ना ।।
रिश्ते  सारे निभाने  हैं 
पर थोडी सी दूरी रखो ना
घर पर दाल रोटी ही खाओ
बाहर का खाना चखो ना   ।।
अपनी संस्कृति को अपनाकर 
साफ सफाई रखो ना
नमन करना है सर्वोत्तम 
हस्त स्पर्श भी करो ना ।।
वृद्ध जन है बहुत अनमोल 
उनका ध्यान सदैव रखो ना
तुलसी, अदरक उष्ण जल है औषधि 
नित्य इनका सेवन करो ना ।।
हमने प्रक्रति को था छेडा
पेड काटे जंगल ना छोडा
सन्तुलन कर दिया डांवांडोल 
उसका ही है ये दण्ड झेलो ना ।।
साफ सफाई नित्य करो तुम 
यज्ञ हवन भी रोज करो ना
साहस धैर्य और निज संयम से 
हम दूर भगायेंगे  करोना  ।।
 डा० रजनी धाकरे






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रचनाकार का नाम: डॉ. इश्हाक मोहम्मद
राज्य: राजस्थान
शीर्षक: कोरोना
          कोरोना के फायदे
          ***************
नदियों का नीर निखर गया,
गगन का रंग साफ हो गया ।
कोरोना के फायदे भी हुए अनेक,
कोरोना तो क्या पवन साफ हो गया।।
     घरों में रहो सब कुछ होगा,
     जिन्दगी बचेगी कोरोना दूर होगा।
     कोरोना से फायदे भी हुए अनेक,
     पर्यावरण शुद्ध हो प्रदुषण दूर होगा।।
बढ़ गया लॉक डाऊंन पालन करो,
सरकारी निर्देशों का पालन पूर्ण करो।
कोरोना के फायदे भी हुए अनेक,
मिल रहे साफ हवा पानी पालन करो।।
    ओर न बढ़ जाए लॉक डाऊन,
    कोरोन को सब मिलकर दूर करो।
     कोरोना के फ़ायदे भी हुए अनेक,
     बिना कहे 6 फीट दूर से बात करो।।
भारत तो विश्व गुरु है,
गुरु ने ज्ञान बता दिया।
कोरोना के फायदे भी हुए अनेक,
विश्व की नमस्ते करना सिखा दिया।।
    लोग नहीं समझ रहे गम्भीरता,
    कोरोना ने अच्छा सबक सिखा दिया।
     कोरोना के फायदे भी हुए अनेक,
     पूरी दुनियां को हाथ जोड़ना सिखा दिया।।
                 डॉ. इश्हाक मोहम्मद
                          एम.बी.,बी.एस







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 रचनाकार का नाम:- हिमांशु रावत 
रचना का नाम:- कोरोना वायरस
विधा:- कविता
शहर:- चंडीगढ़ 

कैसा कोरोना दुनिया पर छाया 
वैज्ञानिकों का सिर चकराया 
जानें है यह कहाँ से आया 
कितनों को इसने शिकार बनाया

कैसी है यह बीमारी 
बन चुकी है महामारी 
है यह भी तक की 
सबसे गंभीर बीमारी

इसकी नहीं बनी कोई दवा 
ना है कोई इलाज अभी
लोगों से दूरी बनाए रखना ही है
इसका उपाय है सही

कुछ तरीके इससे बचने के जान लो 
अच्छा होगा जो इन्हें मान लो

किसी से मिलना हो तो 
उनसे हाथ मिलाना मत 
नमस्ते कर लो चाहे 
उनको गले लगाना मत

छूने से फैलती है 
यह बिमारी ऐसी ही है 
यह हो गया तो कुछ ना कर पाओगे 
हो जाती लाचारी ऐसी ही है

बाहर निकल कर क्या करोगे 
घर में ही बैठे रहो 
जो भी करना है 
घर में बैठकर करते रहो

बहुत जरूरी हो 
तभी बाहर निकलना 
जितना हो सके 
बाहर जाने से बचना

सुरक्षित रहिए 
आबाद रहिए 
घर के अंदर ही 
आज़ाद रहिए



______________15____________
 नाम- बिजेन्द्र अहीर
राज्य- छत्तीसगढ़ ,जिला- कोरिया
शीर्षक- "कोरोना हारेगा जरूर"
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घेरा है सम्पूर्ण जगत, कहला रहा विश्वव्यापी,
 जीवन श्वास छिनने वाला, यह है पामर , पापी।
अभेद ,अद्वितीय, इसकी व्यूह रचना,
दूभर, दुस्कर सर्वथा ,इसके प्रकोप से  बचना।
 हो चाहे कितना भी यह क्रूर,
 कोरोना हारेगा जरूर।।

 यत्र ,तत्र, सर्वत्र,इसके कारण दुख संताप,
कलुष चरित्र वाला यह , मानवता का अभिशाप।
तितर-बितर  हुआ जीवन, अब ना होने देंगे बिखराव,
 इसके संहार के लिए,कुछ ऐसा करेंगे आविर्भाव।
आशाएं अब न होंगी चकनाचूर,
 कोरोना हारेगा जरूर।।



स्वमेव ही हो  जायेगा , इस दुष्ट का दलन,
 नियम ,संयम का बस ,तुम करते रहो पालन।
  रखो सामाजिक दूरी, सफल होगा अभियान,
 जनमानस मध्य, आओ बाटें यह ज्ञान।
 इस उपक्रम से न होगा लक्ष्य दूर, 
कोरोना हारेगा जरूर।।

गहरी संकट लाया है, कोरोना का यह रोग ,
आओ आगे बढ़कर करें, एक दूसरे का सहयोग।
 एकता ,अखंडता के साथ, यदि लड़ पाए यह लड़ाई, 
अविलंब ,अतिशीघ्र देखना ,होगी इसकी विदाई।
 अंततः नाच उठेगा मन मयूर,
 कोरोना हारेगा जरूर।।

              बिजेन्द्र अहीर


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 नाम- डॉ राजीव पाण्डेय
राज्य - उत्तर प्रदेश
शीर्षक-कोरोना के दोहे

चला चीन से वायरस,धरे रूप विकराल।
राक्षस जैसी वृत्ति का,है कोरोना काल।

कोरोना से कब बचा,कोई राजा रंक।
इसके सम्मुख जो गया, मिला विषैला डंक।

एक मुखौटा मुख लगा, हों प्रच्छालित हाथ।
चौखट के अन्दर रहें, बस अपनों के साथ।

भीड़ भाड़ के क्षेत्र में, नहीं करें  प्रस्थान।
सामाजिक दूरी बनी, जीवन की वरदान।

किसी बाहरी वस्तु को, मत करना प्रयोग।
जीवन से भी मिट सके,बहुत बड़ा दुर्योग।

डॉ राजीव पाण्डेय
गाजियाबाद

1 comment:

  1. बहुत ही अच्छा प्रयास है महोदय जी 💐🙏🌷
    मैं भी इस पेज मे भाग लेना चाहता हूँ कृपया मार्गदर्शन देने की कष्ट करें 🌷🌹💐🙏

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दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

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