Wednesday, May 20, 2020

छत्तीसगढ़ के जांचगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- गीत

नाम-गिरधारी लाल चौहान
स्थान-- नवापारा खुर्द/सक्ती
 जिला जांजगीर-चांपा
राज्य छत्तीसगढ़
विधा-गीत
शीर्षक---हंसी का पैकेट


व्याख्या---प्रस्तुत गीत में नायक हंसी का पैकेट बेचते रहता है, उसके हाथ में एक पैकेट रहता है उसे हंसी का पैकेट बताता है, उसे खरीदने का आग्रह करता है ,उसकी विशेषता बताते हुए कहता है कि इसके उपयोग करने से हरदम हंसते रहोगे इससे जीवन संवर जायेगा।रोना धोना भूल जाओगे। उपयोग करने के तरीके के बारे में बताता है कि इसमें फूलों की तरह खुशबू है इत्र की तरह लगाना है इसके लगाते ही हंसी निकलती है सारे गम दूर हो जाते हैं जो गमों में डूबे हुए हैं ऐसे व्यक्ति ज्यादा सोच विचार न करें और खरीद लें ।इसकी कीमत सौ रुपए है पैसे को मत देखो यह खुशियों से अंग अंग भर देगा ।इसे लगाने से पत्नि खुश बच्चे खुश माता, पिता, पड़ोसी,मित्र, सगे,
संबंधी सभी अच्छे लगते हैं,इसे अपने पास रखो जीवन सुधारो
ए आयुर्वेदिक देशी माल है खतरे का डर नहीं है । मैं चाहता हूं हर घर में एक डिब्बा नहीं दो दो रहना चाहिए । नेता ,मंत्री कलेक्टर सभी लगाते हैं तुम भी इसका उपयोग करके खुद को उबार लो ।


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हंसी का पैकेट
ए हंसी का पैकेट है,ले लो इसको यारों ।
हरदम इससे खुश रहोगे, जीवन इससे संवारों ।
रोना धोना भूल जाओ,दुख को गोली मारो ।

फूलों की तरह खुशबू है, इत्र जैसे लगाना है ।
लगते ही हंसी निकलेगी,गम से दूर हो जाना है ।
गम वालों सुनो सुनो, ज्यादा कुछ न विचारो ।

ज्यादा कीमत है नहीं,सौ का नोट लगेगा ।
फायदा फिर देखना,अंग अंग खुशियां भरेगा ।
मत देखो पैसे को तुम,दुखी मत जीवन गुजारो ।

इसे लगाने से पत्नि खुश, माता पिता और बच्चे ।
पड़ोसी,मित्र,सगे, संबंधी,सब लगते हैं अच्छे ।
ले जाओ अपने पास रखो, दुनियां अपना सुधारो ।

ए देशी आयुर्वेदिक माल है,खतरे का नहीं डर ।
मैं चाहूं एक नहीं दो-दो, रहना चाहिए घर घर ।
नेता मंत्री कलेक्टर लगाते, तुम भी खुद को उबारो ।

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