Monday, May 11, 2020

मध्यप्रदेश से आनंद जैन "अकेला" की ग़ज़ल

कवि आनंद जैन "अकेला"
मध्य प्रदेश
 गजल-      मीठा ज़हर


मुंसिफ ही नहीं चाहता,हो अम्न शहर में।

गुम हो रही इंसानियत, हर एक बशर में।। १

अब डर नहीं रहा, किसी को कोतवाल का।

अब हो रहीं मनमानियां, बेखोफ नगर में।  २

है खोफ़ ज़दा नारी, व्यभिचार देख कर।

शर्म-ओ-हया बाकी कहां कातिल की नज़र में।।  ३

वादों पे ये जनता टिकी, वादों की सियासत।

ये  ज़िंदगी  डूबी हुई  है, मीठे ज़हर  में।। ४

आसान होगी  कैसे , ये राह- ए- ज़िंदगी  ।

जब हमसफ़र ही छोड़ दिया, बीच सफ़र में।।५

बेचैन  हैं  सूखे  हुये , शाखों  पे  परिंदे ।

हरियाली नज़र आती नहीं, देखो सजर  में।। ६

अब काफिया  रदी फ़ की , सोचो न"अकेला"।

कवि लिख रहे नवगीत कहां, छंद बहर में ।।७

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...