जांजगीर(छ.ग.)
शीर्षक-मतलब की यारी
दुनिया सारी मतलब की यारी,
स्वार्थ ही है दुनिया को प्यारी।
करते हैं लोग दोस्ती मतलब से,
स्वार्थ सिध्दी के लिए कसम से।
कुछ दिन तो वो हैं प्यार लुटाते,
अजब-गज़ब मिशाल दिखाते।
झुठी दोस्ती पहचान के चलना,
अपना पराया तौल के चलना।
अपनों ने सुंदर लगाया मुखौटा,
दोस्त बन दुश्मन को छिपाया।
दगाबाजी का खेल चल रहा है,
कदम अपने फूंक के रखना है।
लता शर्मा
No comments:
Post a Comment