गोमती सिंह
जिला- कोरबा छत्तीसगढ़
विधा- कविता
शीर्षक-" राज्याभिषेक से वनवास तक "
" राज्याभिषेक से वनवास तक "
अयोध्या नगरी का है दृश्य निराला
क्योंकि आज है श्री राम जी का राज्याभिषेक होने वाला ।
पौं फटते ही नर और नारी
सजाने लगी सारी अयोध्या नगरी ।
उल्लासित और पुलकित मन से,
सज गई हर इक बाला ,
क्योंकि आज है श्री राम जी का राज्याभिषेक होने वाला ।
हर पथ को चंदन से महकाती,
मंगल गीत गाती
उमंग की लहर में चलती
अपने ही परिधान में फंस कर वो बार -बार गिर जाती ।
नहीं पता था मगर किसी को,
है आज कौन दिन आने वाला !
सन्नाटे में बदल जाऐगा,
अयोध्या का यह दृश्य निराला ।
क्योंकि आज ही के दिन तो था ,
वनवास श्री राम जी का होने वाला ।
खुशी से झूमते नर-नारी को ,
है अभी संदेशा मिलने वाला ,
अयोध्या नगरी के अनुपम दृश्य को है आज ग्रहण लगने वाला ।
कलेजा थाम लो ऐ नगरवासी!
वनवास श्री राम जी को है होनें वाला ।
कैसे लिखूँ मैं....दशा दशरथ की
जैसे हिरण को ब्याधे ब्याला,
तीर लगा है दो वरदानों का ,
प्राण अभी है छूटने वाला ।
बंद करूँ मैं लेखनी अपनी
आज अयोध्या का दिन है काला ।
( छोटा सा प्रयास)
----मेरी कलम से
ब्याख्या--रचनाकार रामचरितमानस के वनवास प्रसंग के शोक को अपने शब्दों में ब्यक्त करने का प्रयास की है ।
-गोमती सिंह
राम चरित मानस में श्री राम जी के राज्याभिषेक से उनके वनवास के प्रसंग को अपनी लेखनी में अभिब्यक्त करने का प्रयास अत्यंत सुंदर है
ReplyDelete👌🙏
ReplyDeleteबहुत उम्दा....❣️
ReplyDeleteसच मे दृश्य निराला है बहुत बढ़िया
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