Saturday, May 23, 2020

छत्तीसगढ़ के कोरबा से गोमती सिंह की रचना- राज्याभिषेक से वनवास तक

रचनाकार का नाम-
गोमती सिंह 
जिला- कोरबा छत्तीसगढ़ 
विधा- कविता 
शीर्षक-" राज्याभिषेक से वनवास तक "



" राज्याभिषेक से वनवास तक " 
अयोध्या नगरी का है दृश्य निराला 
       क्योंकि आज है श्री राम जी का राज्याभिषेक होने वाला ।

पौं फटते ही नर और नारी 
         सजाने लगी सारी अयोध्या नगरी ।

उल्लासित और पुलकित मन से, 
         सज गई हर इक बाला ,
      क्योंकि आज है श्री राम जी का राज्याभिषेक होने वाला ।

हर पथ को चंदन से महकाती, 
मंगल गीत गाती 

उमंग की लहर में चलती 
       अपने ही परिधान में फंस कर वो बार -बार गिर जाती ।
        
        नहीं पता था मगर किसी को, 
     है आज कौन दिन आने वाला ! 

सन्नाटे में बदल जाऐगा, 
    अयोध्या का यह दृश्य निराला ।
          क्योंकि आज ही के दिन तो था ,
     वनवास श्री राम जी का होने वाला ।

खुशी से झूमते नर-नारी को ,
         है अभी संदेशा मिलने वाला ,

अयोध्या नगरी के अनुपम दृश्य को है आज ग्रहण लगने वाला ।

कलेजा थाम लो ऐ नगरवासी! 

वनवास श्री राम जी को है होनें वाला ।

कैसे लिखूँ मैं....दशा दशरथ की 
       जैसे हिरण को ब्याधे ब्याला, 
        तीर लगा है दो वरदानों का ,
      प्राण अभी है छूटने वाला ।

बंद करूँ मैं लेखनी अपनी 
आज अयोध्या का दिन है काला ।
          ( छोटा सा प्रयास)
      ----मेरी कलम से



ब्याख्या--रचनाकार रामचरितमानस के वनवास प्रसंग के शोक को अपने शब्दों में ब्यक्त करने का प्रयास की है ।
                                                    -गोमती सिंह

4 comments:

  1. राम चरित मानस में श्री राम जी के राज्याभिषेक से उनके वनवास के प्रसंग को अपनी लेखनी में अभिब्यक्त करने का प्रयास अत्यंत सुंदर है

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  2. बहुत उम्दा....❣️

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  3. सच मे दृश्य निराला है बहुत बढ़िया

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