Saturday, May 23, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से प्रवीण कुमार ठाकुर की रचना- मौन

**************************
रचनाकार  -- प्रवीण कुमार ठाकुर
जिला      --  राजनांदगाँव (छ.ग.)
विधा       --  कविता (करुण रस)
शीर्षक     --  "क्यों ईश तू मौन"
**************************
कविता :--
********
क्यों ईश तू मौन ,
     देखता ही रह गया ।
          जब ग्रसा काल लाल ,
               माता के आँचल से ।१।
**************************
पाला जिसने नौ मास ,
     गर्भ में धर ममता से ।
          छिन लिया क्षण में ,
               मृत्यु ने छल से ।२।
**************************
पुत्र वियोग में बेसुध ,
   धीर न जननी धर पायी।
        देख सकी न मुख लाल का,
               अश्रु भरे लोचन से ।३।
**************************
भंग हुई अभिलाषाऐं ,
  सुनने को किलकारी ।
     माँ के करुण क्रंदन से ,
        ईश तेरा ह्रदय न पिघला।४।
**************************
क्यों ईश तू मौन ,
     देखता ही रह गया ।
          जब ग्रसा काल लाल ,
               माता के आँचल से ।५।
**************************
व्याख्या  :---
**********
प्रस्तुत कविता में कवि ने उस दुख
स्थिति का वर्णन किया है जब माँ
अपने जन्मे  बच्चे , जिसे  ठीक से 
देख नहीं पायी थी लाड दुलार ही
नहीं कर पायी थी  कुछ क्षण बाद
ही मृत्यु हो जाती है का बहुत ही 
करुणा पूर्ण मार्मिक चित्रण किया
है ।।
**************************
 रचनाकार 
*************
प्रवीण कुमार ठाकुर 

**************************

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...