रचनाकार -- प्रवीण कुमार ठाकुर
जिला -- राजनांदगाँव (छ.ग.)
विधा -- कविता (करुण रस)
शीर्षक -- "क्यों ईश तू मौन"
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कविता :--
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क्यों ईश तू मौन ,
देखता ही रह गया ।
जब ग्रसा काल लाल ,
माता के आँचल से ।१।
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पाला जिसने नौ मास ,
गर्भ में धर ममता से ।
छिन लिया क्षण में ,
मृत्यु ने छल से ।२।
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पुत्र वियोग में बेसुध ,
धीर न जननी धर पायी।
देख सकी न मुख लाल का,
अश्रु भरे लोचन से ।३।
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भंग हुई अभिलाषाऐं ,
सुनने को किलकारी ।
माँ के करुण क्रंदन से ,
ईश तेरा ह्रदय न पिघला।४।
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क्यों ईश तू मौन ,
देखता ही रह गया ।
जब ग्रसा काल लाल ,
माता के आँचल से ।५।
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व्याख्या :---
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प्रस्तुत कविता में कवि ने उस दुख
स्थिति का वर्णन किया है जब माँ
अपने जन्मे बच्चे , जिसे ठीक से
देख नहीं पायी थी लाड दुलार ही
नहीं कर पायी थी कुछ क्षण बाद
ही मृत्यु हो जाती है का बहुत ही
करुणा पूर्ण मार्मिक चित्रण किया
है ।।
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रचनाकार
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प्रवीण कुमार ठाकुर
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