जिला- बीकानेर
शीर्षक- चेता चूक
कविता-
चेता -चूक
अबै कित्तो बढ़ गय्यो मानखो
मिनख बापड़ा हुय्य गय्या
चेता -चूक ।
विकास री बातां सगळा करै
मिनखां री निकळ गी फूंक
क्यूंकै सगळा होय गय्या - चेता - चूक ।
एकता रा ढोल सगळा पीटै
भाषण में सगळा विष घोळै
कूड़ा बिलोवै थूक , हो गय्या चेता - चूक ।
जनता रो कुण भलो चावै
संसद में कंजर दैंइं लड़ै
देस जावै भाड़ में , क्यूं कै हो गय्या चेता -चूक ।
भिरष्टाचार री आंधी बाजै
भिंटोरा रा भिंटोरा उडै
पुण्य्यां उड़ती जावै दूर ,हो गय्या चेता - चूक ।
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