Monday, May 4, 2020

राजस्थान से डॉ एन के सेठी की रचना

डॉ एन के सेठी
बाँदीकुई(दौसा)राज.
अपना मानव धर्म करो
मो.9414335460

*अपना मानव धर्म करो*



समय नही अब गुण दोषों का
              आगे बढ़कर कर्म करो।
मानवता की रक्षा करने
             अपना मानव धर्म करो।।
               
संकट की इस कठिन घड़ी में
              एक रहो अरु नेक रहो।
राजनीति को भूलो अब तो
                 हिंदुस्तानी एक रहो।।
                
धर्म जाति की सीमाओं को
         सब जन मिलकर के तोड़ो।
मानवता अरु भाईचारा
              बंधन आपस में जोड़ो।।
                
वसुधैव कुटुम्बकम उद्घोष
            यही सनातन संस्कृति है।
संकट में हम दया दिखाएं
            यह तो हमारी प्रकृति है।।
                 
इस महामारी का न कोई 
               अपना और पराया है।
करो नही आचरण अपावन
          सब पर दुख का साया है।।
                 
बनो ना हैवान कोई भी
             मानवता तो दिखलाओ।
कुतर्कों के शर न फैंको
            वक्त यही संभल जाओ।।
                
खाक ना बन जाए कहीं ये
                  सुंदर सा घर तुम्हारा।
करो न काम नैतिक पतन का
              रिश्ता न बिगड़े हमारा।।
               
जो धर्म का चोगा पहनकर
                 फैला रहे अज्ञान को।
धर्म के नाम पर डाल रहे
             मुसीबत में इंसान को।।
              
ये वक्त नाजुक है बड़ा ही
          अब तो सब संभल जाओ।
भूल जाय मतभेद पुराने
           सबको तुम गले लगाओ।।
              
एक दिन ये हार जाएगा
               शत्रु है इंसानियत का।
मिलकर इसे हराए हम सब
            करें मान हम भारत का।।



            ©डॉ एन के सेठी

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...