जिला-महासमुन्द(छ. ग.)
विधा-कविता (करुण रस)
शीर्षक-माँ तुम चाहो तो
कविता- माँ तुम चाहो तो...
(सन्दर्भ - कन्या भ्रूण हत्या पर आधारित)
माँ अनुभव करो ,
मेरा पहला एहसास,
आपकी पवित्र कोख में,
लेकर जीवन की आस,
लेने लगी हूँ मैं आकार,
माँ तुम चाहो तो मेरा भी बनेगा आधार।
सुखद नवजीवन,
स्वर्णिम नवसंसार,
नौ माह का इंतजार,
फिर आपकी गोद में ,
बनूंगी मैं सजीव उपहार,
माँ तुम चाहो तो,
मेरा भी होगा नामकरण संस्कार।
फूलों सी सौंदर्य,
कलियों सी मुस्कान,
बनूँगी मैं आपके ममता की पहचान,
मेरी किलकारी से,
गूँज उठेगा आपका घर संसार,
माँ तुम चाहो तो,
मेरा भी होगा समाज से सरोकार।
भाई के हाथों की राखी,
सुख-दुःख में आपकी सखी,
स्वभाव से आज्ञाकारी,
बनकर रहेगी आपकी नन्ही परी,
नाजों से पलकर पढ़कर,
करूँगी पापा के सपनों को साकार,
माँ तुम चाहो तो,
मेरा भी होगा पद्मावतार।
आपके आदर्श की छाया,
पापा की अरमान,
घर -परिवार की शान,
लेकर बसाऊँगी नव संसार,
ससुराल की दहलीज पर ,
स्नेह बरसाऊँगी अपार,
माँ तुम चाहो तो,
मेरा भी होगा सोलह श्रृंगार।
माँ तुम चाहो तो,
मेरा भी बनेगा आधार।
रचना :- डॉ.अनिल प्रधान "एकांश"
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