Thursday, May 14, 2020

छत्तीसगढ़ के कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- विद्रोह

रचनाकार- सुश्री नलिनी बाजपेयी
शीर्षक-विद्रोह
जिला-कांकेर
विधा-कविता छंद मुक्त
         विद्रोह
..........................................
विद्रोह भरी भूख है मेरी,
विद्रोह भरी प्यास,
कैसे तुम सबको बतला दूं 
मैं हूँ क्यों चुपचाप?

शोषित, पीड़ित रही
 मैं सदियों से,
आज बनाने चली हूं ,
अपने दम पर खुद को खास।

मैं बनाऊंगी और बनूंगी 
दुर्गा काली की आस,
समाज में नित करूंगी 
महिषासुर का नाश।

मैं बलिपथ का शोला बन  जाऊंगी, 
राहे-वतन पर मिट कर
सबकुछ लूटा जाऊंगी ।
              
सरहद की रक्षा के लिए 
मील का पत्थर बन जाऊंगी।
दुश्मनों के रक्त की प्यासी 
मैं कालिका बन जाऊंगी ।

कैसे ,कौन रोकेगा मुझे 
पर्वत से  लड़ जाऊंगी,
घनघोर घटाओं में तिमिर हरण को 
सौदामिनी बन जाऊंगी।

सागर का सीना चीरने 
नौका बन जाऊंगी,
जो मुझसे बेवजह उलझेगा 
ज्वालामुखी बन फट जाऊंगी।

विद्रोह भरी भूख है 
मेरी विद्रोह भरी प्यास,
कैसे तुम सबको बतला दूं, 
मैं क्यों चुपचाप?
...............................
       नलिनी बाजपेयी
   संबलपुर,कांकेर (छ. ग.)

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