Thursday, May 14, 2020

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से लक्ष्मण प्रसाद साहू की रचना- जीवन की अभिलाषा

नाम -लक्ष्मण प्रसाद साहू 
जिला -बिलासपुर (छ. ग. )
शीर्षक -जीवन की अभिलाषा 
विधा -गीत 

जीवन की अभिलाषा ये है, 
जीवन की परिभाषा ये है l
नित नई आशा मर्यादा ये है, 
मानवता का वरण करना है ll

मेरा, तेरा, इसका, उसका, 
इन बातों से सब को बचायें l
कैसे कहूं काल की आंधी, 
कैसे किसी को उड़ा ले जाये ll

कौन खड़ा है भीड़ मे आगे, 
हाथ बढ़ाते व साथ मे आते l
आगे पीछे होते रहने से तो, 
अच्छा है हम पीछे न जायें ll

कल क्या होगा हम सोचें तो, 
रुक जायेगा जीवन सफर ll
चलते रहना अटल नियति है, 
ये ही है जो सदा हम सब के ll

मानवता की विराट है व्यथा, 
हर पल ह्वास सा घटित हो रहा l
आओ हम तुम सब ये कर जायें, 
राष्ट्र धर्म पर सदा मर मिट जायें  ll

अभी यही है स्वर्णिम प्रश्न सभी को, 
विश्व बंधुत्व ही सबका मूल मंत्र है l
है करना शुरुआत हमें तो देर न कर, 
हर दिन शुभ है, हर पल शाश्वत है ll

सो अहम् का मनन कर तो लें , 
परम तत्त्व का नमन कर तो लें l 
विश्व पटल की चाहत असीमित, 
करना हैं हमें प्रयास चिरन्तन ll

मानवता का सदा मान रख सकें, 
सदाचार का गान, बखान कर सकें l
यही है जीवन की चिर अभिलाषा, 
जीवन पथ की अमित मर्यादा ll




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भावार्थ -वर्तमान परिदृश्य मे सब कुछ बदल गया है. जीवन तो है परन्तु उसका सही आशय तभी मिल पायेगा जब मानव के अंदर मानवता का उद्घाटन होगा. मानव  मे सहयोग की भावना, आगे आने की भावना विकसित होना है. राष्ट्र धर्म, अध्यात्म, सदाचार मानव मे हो और यही जीवन की अभिलाषा है.

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