जिला-रायगढ़
विधा-कविता
शीर्षक-जीवन
जीवन ही तो जीना है
जीना ही तो जीवन ।
सुखी जीवन जीना है
करलो सबसे मिलन ।।
जीवन ही तो आनंद है
प्रेमानन्द ही बनना ।
बिन जीवन सब व्यर्थ है
मुक्तानन्द मत बनना ।।
जैसा जीवन जिओगे
फल भी वैसा पाओगे।
सत जीवन के बिन प्यारे
फल भी एक न पाओगे।।
अच्छा करम करोगे तब
सतकर्मी ही बनना ।
सतकरम को छोड़ के वन्दे
दुष्कर्मी मत बनना ।
जीवन ही सतकर्म है
यह है अनमोल ।
सद्जीवन ही जीना है
कभी न करना मोल।।
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