Monday, May 25, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से प्रवीण कुमार ठाकुर की रचना- लालच

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रचनाकार - प्रवीण कुमार ठाकुर
जिला -- राजनांदगाँव (छ.ग.)
विधा  -- गीत(भजन) 
शीर्षक - " लालच "
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गीत :--
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मनखे  ह  मनखे  ले ,
          काबर ओधा  करे हे ।
होथे  भरोसा  जेकर ,
          विहि धोखा करे हे ।१।
००००००००००००००००००००
छल अउ कपट जम्मो ,
          मन म समाए रहिथे ।
मनके अइसन करिया ,
          उज्जर चोला करे हे ।२।
००००००००००००००००००००
धुर्रा  ल  रद्दा  के ,
          कम  मत  जानो ।
लात के मरइय्या  ल ,
          मइला  करे  हे ।३।
००००००००००००००००००००
धन  के तै  कमइय्या ,
          रामे  नामे  ल  कमाले ।
खोंची भर धन बर तै ,
          तोला  मोला  करे  हे ।।
००००००००००००००००००००
मनखे  ह  मनखे  ले ,
          काबर ओधा  करे हे ।
होथे  भरोसा  जेकर ,
          विहि  धोखा  करे  हे ।५।
०००००००००००००००००००
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००००००००००००००००००००
व्याख्या  :---
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प्रस्तुत गीत म मैं मानव के लालची
स्वभाव ल उजागर करे के प्रयास
करे हों तथा आघु के पंक्ति म यहु
बताए के कोशिश करे हों कि कोई
ल भी हमन ल छोटे नहीं समझना
चाहिए , अइसन हमर समझ हर
हमला नुकसान पहुंचा सकथे ।।
००००००००००००००००००००

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