Tuesday, May 12, 2020

कर्नाटक से खेमकिरण सैनी की रचना- जाने कहाँ गुम हो गई नैतिकता

नाम - खेमकिरण सैनी
राज्य - कर्नाटक
शीर्षक-  जाने कहाँ गुम हो गई है नैतिकता
संपर्क- 


ढूंढ़ा हाट बाज़ारों में
छज्जों और चौबारों में
मिली नहीं कहीं नैतिकता
निगल गई क्या आधुनिकता?
जाने कहाँ गुम हो गई है नैतिकता!

जिससे हीन हो गई मानवता
जिसे छीन ले गई भौतिकता
जिसे भुला चुकी आधुनिक सभ्यता
जाने कहाँ गुम हो गई है नैतिकता!

रिश्तों में घट रही आत्मीयता
चरित्रों में झलके अश्लीलता
बातों में बनावटी विभवसनीयता।
सम्बन्धों में अवांछित गोपनीयता।
जाने कहाँ गुम हो गई है नैतिकता!

वात्सल्य घटता जाता है
बढ़ रही दौलत से मोह ममता,
मां बाप की उपस्थिति लगे ज़हर
बच्चे नापें अपना अपना रास्ता।
चंद सिक्कों में बिक जाए
ईमान हुआ कितना सस्ता।
न जाने कहाँ गम हो गई नैतिकता।

संवेदनाओं का मोल नहीं
दिलों में वैमनस्य हौ पलता
संवेदनाएं मुरझाई जाती है
ईर्ष्या का पौधा है पलता 
भटक गए जीवन पथ पर सभी
सही मार्ग  नहीं है मिल पाता
जाने कहाँ गम ही गई है नैतिकता।

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