राज्य -- छत्तीसगढ़
कविता का शीर्षक--नैतिक मूल्य
संपर्क नम्बर-- 7000172159
नैतिक मूल्य
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हो रहा हास आज नैतिकता का
पशचिमि सभ्यता पहचान आधुनिकता का
न बेटा देता मान माँ बाप को
न बेटी करती सम्मान हैं
हर तरफ छायी चकाचौंध
खुद को सब समझे सबल सूजन हैं
हमारी सभ्यता संस्कृति
कीचड़ से लथपथ पड़ी हुई
न कोई गंगा जल मिलता
न दिखता अब ये धुली हुई
अपना हित साधे सब चले हुए
अपने सर्वार्थ की परिभाषा से बंधे हुए
पर असली थाति पहचानों तुम
पारस से भी ये कीमती इसका मोल जानो तुम
सब खो कर जब तुम जागो गे
उस दिन खूब पछताओगे
नैतिक मूल्य और संस्कृति को अपना लो
खुद का जीवनऔर देश दोनो को बचा लो।
रचनाकार- वीरेन्द्र कुमार साहू
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