Monday, May 11, 2020

उत्तरप्रदेश से हर्षिता वर्मा की रचना

हर्षिता वर्मा , 
गाजियाबाद, UP
शीर्षक -मां 

मां तुम कितनी अच्छी हो,
 दिल की कितनी सच्ची हो ।
कभी न थकती ,
कभी न रुकती,
 बिल्कुल घड़ी के जैसी हो ,
टिक टॉक करती रहती हो ।

बारिश में तुम मुझे भिखारी,
 पर तूफानों से भी बचाती ।
सुबह की नर्म धूप दिखाती,
 तपते दिन में ढकती जाति ।
सर्द हवा लग जाए कभी तो,
 गरम गरम पकवान खिलाती ।
मुझे पसंद जो चीज अगर आती ,
तुम अपना हिस्सा भी मुझे थमाति ।
फिर जब पढ़ाई की चिंता सताती ,
तुम मुझे बादाम खिलाती ।
पापा की डांट से तुम मुझको ,
हर पल ढाल बनकर बचाती ।
आज भी तुम वैसी ही हो ,
दिल की इतनी अच्छी ही हो ।
मां तुम कितनी अच्छी हो ,
दिल की कितनी सच्ची हो!

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