राज्य - छत्तीसगढ
कविता का शीर्षक - "सत्य पथ"
मोबाइल - 8827271176
कविता -
सत्य कर्म के लिए कभी न सुस्ती नाम को l
बहाना बना कर न बिगाड़ श्रेष्ठ काम को l
जो सत्य कर्म मिला है उसे आत्मसात कर लो l
विजय के हर पथ को अपना साथ कर लो l
जीवन एक रंग मंच बेहतर एवँ सत्य लीला है l
दूसरों को आघात कर कैसे जीवन जीना है l
मनुष्य के आँख में धूल झोंक कर कैसे बच पाओगे l
लेकिन पर ब्रम्ह के न्याय से क्या बचा ले जाओगे l
धोखा दे कर कुछ क्षण ही खुश रह पाओगे l
शेष क्षण जीवन को अफसोस में बिताएंगे l
मन के सकारात्मक शक्ति का आह्वान करो l
नकारात्मक चरित्र के विश्वास का त्राण करो l
बिना व्यथाओं के मनुज में रंग प्रिय भाता नहीं l
ठोकरें खाय बिना, पथ ठोस जग पाता नहीं l
हमारे जीवन की हर श्वास हैं बहुमूल्य l
चिंता करना चिता के है समतुल्य l
चिन्ता क्या करना सत्य पथ पर बढ़ते चलो l
दुःख दर्द और क्लेश का समन करते चलो l
बहुत सुन्दर कविता,बधाई सर
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