Tuesday, May 19, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से अजय पटनायक की रचना- स्वीकार नहीं

रचनाकार:- अजय पटनायक
विषय:- रौद्र
विधा:- मुक्तक
शीर्षक:- राम राज्य स्वीकार नही
पता:- रायगढ़,छत्तीसगढ़


*राम राज्य स्वीकार नहीं*
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 राम राज्य स्वीकार नहीं,अभी और भी रावण जिंदा है।
 तिर के तरकस सूने पड़े हैं,माता सीता शर्मिंदा है।।
स्वामी लुटेरा बन बैठा,चोर सभी कारिंदा है।
*राम राज्य स्वीकार नही*
अभी और भी रावण जिंदा है।।

 मन में अहंकार जाग रहे हैं,लोग धन के पीछे भाग रहे हैं।
 राग द्वेष की मेघ गर्जना,बुराई से भीख मांग रहे हैं।।
 दसों दिशाये अधर्मी बैठे,पापों का ऐसा पुलिंदा है। 
*राम राज्य स्वीकार नहीं,* 
अभी और भी रावण जिंदा है।।

भाई- भाई में प्यार नहीं,मां-बाप का कुछ अधिकार नहीं ।
दर-दर भटक रहे हैं रिश्ते, स्वीकार किसी को परिवार नहीं।।
 चापलूसी मित्र बन बैठे हैं,अपने ही करते निंदा है। *राम राज्य स्वीकार नहीं* अभी और भी रावण जिंदा है ।।

आतंक अत्याचार बढ़ गया है,जिधर देखो भ्रष्टाचार बढ़ गया है ।
दीन दुखियों का दमन हो रहा,दमनकारी सरकार बढ़ गया है।।
असंख्य बुराई पनप रही,अच्छाई तो बस चुनिंदा है। 
*राम राज्य स्वीकार नहीं*
 अभी और भी रावण जिंदा है।।

 कोख में बेटी चीख रहे हैं,अपमान सहना सीख रहे हैं।
 धर्म के ठेकेदार वहशी बन बैठे,ठोकर खाते ईमान दिख रहे हैं।।
झुग्गी में भगवान रह गए,रावण महल के वाशिंदा हैं। *राम राज्य स्वीकार नहीं*
 अभी और भी रावण जिंदा है।

मौलिक रचना-
अजय पटनायक

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