जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़
कविता- आओ धरा पर वृक्ष लगा प्रकृति का संतुलन बनाएं
आओ धरा पर वृक्ष लगा,
प्रकृति का संतुलन बनाएं!
तरु से वंसुधरा सुसज्जित कर,
धरती को हरित चुनर ओढ़ाएं!
हरीतिमा से आच्छादित ,
वसुंधरा दुल्हन सी सजाएं!
रत्नों से सुसज्जित कर ,
इस धरा को स्वर्ग बनाएं!
पक्षी कलरव, गुंजित उपवन ,
झर- झर बहते झरने को बचाएं!
तरु जीवन संजीवनी ,
पशु-पक्षियों का आशियाना बचाएं!
आओ धरा को मनोरम बना,
पर्यावरण स्वच्छ बनाएं!
बंजर होती धरा को ,
वृक्ष लगा वर्षा जल से नहलाएं!
धरा के सकल जीव को ,
प्राणवायु देने नाना वृक्ष लगाएं!
शीतल सुगंधित वृक्ष रोप ,
चारों दिशा को महकाएं!
एक वृक्ष सौ पुत्र सम ,
हम सब मिल वृक्ष लगाएं!
वसुंधरा दूषित ना हो,
नित संकल्प उठाएं!
आओ धरा पर वृक्ष लगा ,
इस धरा को स्वर्ग बनाएं!
आओ धरा पर वृक्ष लगा ,
प्रकृति का संतुलन बनाएं!!
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स्वरचित
पदमा साहू खैरागढ़ जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़
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