जिला - दुर्ग
राज्य - छत्तीसगढ़
विधा - कविता
शीर्षक - पेड़ लगाबो, पेड़ बचाबो
पेड़ लगाबो,
पेड़ बचाबो
नदिया,नरवा रोवत हे आज,
परदूसन दानव करत हे राज ,
कचरा, झिल्ली नदिया म डारके,
मइनखे भविष्य ला अंधकार बनात हे |
एक दिन ऐसे आही,
पैसा म मिलही पानी,
हे मइनखे संभल जा,
जल बिन नीरस हे जिनगानी |
पेड़ पर आरी चलाबो त,
परयावरन संतुलन बिगड़ही,
भूंइहा होही परिया त,
अन्न कहां से होही |
पेड़ मे मइनखे बस नही ,
गाय गरुआ, अउ चिरई
के तको हे डेरा ,
बर, पीपल ,आमा के तरी,
बीतथे मंझन के बेरा |
परयावरन सुरक्षित रखबो,
करबो मिलके प्रन,
पेड़ लगाबो, पेड़ बचाबो ,
मिलके जम्मो झन ||
प्रिया गुप्ता
भिलाई
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