राज्य राजस्थान
शीर्षक बंदी जीवन
मो. 9829803895
विषय - बंदी जीवन भी क्या जीवन !
इन दिनों तालाबंदी में मैंने
मानो बंदी सा जीवन जिया ।
ना किसी से मिलना जुलना
ना किसी का घर पर आना ।
खाना पीना और फिर सो जाना
इसके सिवा कोई काम नहीं ।
था तो केवल घर पर रहने का बंधन
बंदी जीवन भी क्या जीवन! ।
इन दिनों महसूस किया मैंने
स्त्रियों के मनोभावों को ।
सदा घर पर रहने वाली
उन स्त्रियों की मनोव्यथा को ।
जो अपना पूरा जीवन अर्पित करती है
परिवार की इच्छा पूरी करने में ।
खाना बनाना , बर्तन साफ करना
कपड़े धोना और अन्य सभी काम करने में ।
कभी विरोध नहीं किया उसने
हंसकर के किया हर कष्ट का सामना ।
तो क्या उसकी कोई इच्छा नहीं?
क्या उसका कोई सपना नहीं?
उसकी भी चाहत होती होगी
पक्षियों जैसे स्वच्छंद रहने की।
इच्छा होती होगी पिया संग में
बाहर जाने और घूमने फिरने की ।
लेकिन इच्छाओं को करके दरकिनार
स्वीकार किया उसने परिवार का बंधन ।
अब मिलनी चाहिए उनको भी आजादी
क्योंकि बंदी जीवन भी क्या जीवन ।
कैलाश शर्मा "गोविन्द"
Bahut sundar
ReplyDeleteक्या बात ह ,,,,सुनकर बहुत अच्छा लगा,, अति सुंदर
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