Tuesday, May 19, 2020

छत्तीसगढ़ के महासमुन्द से विनोद कुमार "जोगी" की रचना- ठहर मत

रचनाकार:- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुन्द
शीर्षक :- पल भर को भी मत ठहर
भाव :- उत्साह

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है कठिन जरूर ये डगर,
थक हार कर तू बीच राह पर,
पल भर को भी मत ठहर।
जो मिला तुम्हें स्वर्णिम अवसर,
ना फिर आएगा लौटकर,
बस चल हर अवसर भुनाकर।
मत आंक निज को कमतर,
ना ठहर तम से डरकर,
रख बात यह मन में बाँधकर,
आएगी नई भोर तम को चीर कर।
चलते चल कमर कस कर,
रहना मत चुनौतियों से झुककर,
हो हौसला तो झुक जाती चुनौतियाँ अक्सर।
निज भुज बल पर विश्वास कर,
रख नव लक्ष्य, शुरूवात कर,
कामयाबी कदम चूमेगी खुद चलकर,
है कठिन जरूर ये डगर,
 थक हार कर तू बीच राह पर,
पल भर को भी मत ठहर।।


व्याख्या:- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार एक राही को संबोधित करते हुए कहते हैं कि हे मुसाफिर जीवन की राह कठिन जरूर है लेकिन खुद पर विश्वास रखकर आगे बढ़। तनिक भी सुस्ताने को मत रूक, तेरे निरंतर प्रयास से सफलता एक दिन जरूर तेरी कदम चूमेगी।

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