Tuesday, May 19, 2020

छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव से रश्मि विपिन अग्निहोत्री की रचना- दहाड़ मारो

कवयित्री- रश्मि विपिन अग्निहोत्री
जिला कोण्डागांँव,छत्तीसगढ़  
रस  - रौद्र रस
शीर्षक - क्षितिज तक दहाड़ मारो ! 

*क्षितिज तक दहाड़ मारो!*

मैं ज्वाला  हूंँ मैं अग्नि हूंँ, 
मैं मांँ बेटी और  भगिनी हूंँ । 
गंगा की निर्मल धारा हूंँ , 
मैं जन्मों का पुन्य सारा हूँ मैं। 
मैं ही सिया रूप लक्ष्मी हूँ, 
यदि छेड़ोगे मुझे फिर 
चंडी रूप में तांडव छायेगा
तुम्हें ना फिर काल भी, 
मेरे चुंगल से बचा पाएगा । 
मेरे क्रोध से अरे! उपजेगी , 
एक नई कहानी इतिहास नया । 
मैं नहीं दामिनी निर्भया सुनो! 
सुलग उठेगी आत्मा  सभी की 
चित्कार बेटी की सुनते
झकझोर देगी मर्दानगी 
संहार से  ही प्यास बुझेगी 
सावधान हे पापियों ! 
मां भारती है रक्तरंजित 
काली बन दौड़ रही आज 
अस्मिता कुचली -कुचली 
उफान पर है सिंधु  आज, 
गरजता -दहाड़ता पुकारता
ना खेलो बेटियों से ना कोख को
मलीन करो तुम जननी की । 
अभी जागी है एक 'रश्मि'
नित कोसती दुष्टों तुम्हें ,
अभी करोड़ों जागेगी 
तो नपुंसकों तुम्हारी, 
पुरुषता भागेगी । 
सत्ता जनक्रांति उमड़ रही है, 
भारत भू का हाल देखो ! 
क्यों ना 'रश्मि 'आज दहाड़े, 
क्यों ना देश के और बेटियों के 
द्रोहियो को मिलकर पछाड़े । 
छिपाकर आँसुओं की धार 
मत मुस्कुराओ तुम बनो चंडी , 
ना शोषिता बन चुप रहो , 
संहार करो, क्षितिज तक दहाड़ करो, 
सिया सी सती पावन रहो... 
सिया सी सती पावन रहो..... 

        रश्मि विपिन अग्निहोत्री
     केशकाल जिला कोण्डागांँव

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