पता - पिपरभावना, बलौदाबाजार, (छ.ग.)
मो. 8120587822
◆मैं क्यों लिखता हूँ◆
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लिखता हूँ मैं मुश्किल वक्त पर,
जोर की आँधी या तूफानों में।
टाइगर हिल हो या सियाचिन हो,
तनिक न घबराते यह वीरों नें।
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गाथा लिखता हूँ सैनिकों की,
जो आतंकवादी से लड़े हैं।
दिलाए है हम सबको आजादी,
ऐसे योद्धा वीर फौलादी हैं।
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माता पिता को छोड़कर वह,
निकल पड़े है मैदानों में ।
मातृभूमि पर शीश नवा के,
देश के वह मतवालों नें।
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लिखता हूँ वीर सैनिकों पर,
जो दुश्मनों पर भारी होते है।
करते योजना उनके नाकाम,
ऐसे वीरों को मेरा प्रणाम हैं।
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तिरंगे की शान में वह,
जय हिन्द के नारा लगाते हैं।
विजय पताका लहराये जब,
जन-गण-मन गीत वे गाते हैं।
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रचनाकार - डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर"
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