Tuesday, May 5, 2020

उत्तरप्रदेश से जितेन्द्र"हमदर्द" की रचना

जितेन्द्र"हमदर्द"
उत्तर प्रदेश
मैं और बादल
8953191518

मैं और  बादल

ये बादल दहाड़ कर मजाक उड़ा रहा।
मेरी आँखे बरसता देख खुद बरस रहा।

तेरा  दिल तो दुखाने वाला कोई नही।
रुठुं मैं! यहाँ मनाने वाला भी कोई नही।

राज करता सब पर अपनी आवाज से।
यहाँ तो निकाल देते दिल के समाज से।

तुम्हें देखकर तो मोर भी नाचने लगते है।
यहाँ लोग मुझे देखकर जलने लगते है।

तू कहीं भी,किसी भी वक्त चला जाता है।
मेरा दिल कहीं भी हर वक्त छला जाता है।

जब गरजता है तुझे अच्छा लगता होगा ना!
मेरे लिए उसका भी दिल धड़कता होगा ना!

बादल तू भी मतलबी है आता चला जाता है।
आज हर शख्स *हमदर्द* को रुला जाता है।

जितेन्द्र"हमदर्द"

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