रचनाकार-श्रीमती पदमा साहू
खैरागढ़ छत्तीसगढ़
विधा- कविता
*कोरोना की मार*
हाय रे! कोरोना तू कहां कहां गई?
सब देश घूम भारत में आ गई।
तु कितनी ज़िद्दी रे कोरोना,
छोटी सी छींक खांसी में समा गई।
चीन वाले तुझे रास नहीं आए,
ताकतवर अमेरिका को खा गई।
गद्दार पाकिस्तान को छोड़,
हमारे भारत पर भी आ गई।
हाय!तू कितनी निर्दयी रे,
गरीबों के जान पर बन गई।
वायरस तेरी इतनी हिम्मत,
ताकतवर इंसान को घर में कैद कर गई।
इंसानों को तड़पा कर ,
उसी के अंदर समा गई।
तूने सबका काम बिगाड़,
मर्दों को घर का काम सिखा गई।
एक काम अच्छा हुआ,
तेरे कारण प्रकृति स्वच्छ बन गई।
बच्चे बूढ़े को बार-बार,
हाथ धोना सिखा गई।
कोरोना तेरे कारण,
भारतीय संस्कृति वापस आ गई
प्रकृति को छेड़ोगे तो कहर ढाएगी,
यह सबक मानव जीवन को सिखा गई।
व्याख्या
प्रस्तुत कविता में कोरोना पर व्यंग करते हुए गया है कि कोरोना तू चीन देश से फ्रांस,अमेरिका पाकिस्तान और भारत पर भी आ गई ।और तू इतनी निर्दयी है कि मजदूर लोगों को भी शिकार बना ली अपना । छोटी सी सर्दी खांसी को लक्षण बना मानव के शरीर पर समा गई और मानव को ही खा गई। लेकिन तूने एक काम इतना अच्छा की कि बच्चे बूढ़ों को बार-बार हाथ धोना सिखा दी। और तूने मर्दों को घर में काम करना भी सिखा दी । तेरे कारण प्रकृति बहुत स्वच्छ बन गई और यह सीख दे गई कि यदि मानव प्रकृति को छेड़ेंगे तो मानव जाति पर प्रकृति भी अपना कहर ढाएगी।
पदमा साहू खैरागढ़ जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़
बहुत खूब मैडम ✌
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