जिला_जांजगीर_चाम्पा, छत्तीसगढ़
विधा---कविता
शीर्षक---दिहाड़ी मजदूर
व्याख्या____प्रस्तुत कविता में कवि देहाड़ी मजदूरों के समस्याओं का समाधान एवं मजदूरों के शोषण का उल्लेख किया गया है ।
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देहाड़ी मजदूर
देहाड़ी मजदूर तेरी कर्म कहानी,
बहुत हो चुके कहते सुनते ।
आंखों में आ गया पानी ।
जीवन तेरा मुझको लगते
मानों दीपक सा बुझते बुझते ।
सारे जग में कौन सी वस्तु
जिस पर तेरी नहीं निशानी ।
फिर भी तेरा शोषण
रुकने का नहीं नाम ले रहा ।
जितना तुझसे लिया जाता श्रम
उतना कोई न दाम दे रहा ।
लगता तेरी मेहनत को
मानो मुफ्त पाने सब ठानी ।
सब कुछ तेरा छीना जा रहा ।
मानो सब कुछ अपना है
धन ,बल ,शिक्षा,आयु,जन ।
तेरे लिए सब सपना है ।
कदम कदम लाचार बन रहा ।
ओ श्रम के वरदानी ।
खुद को तुझे बदलना होगा ।
लोगों को तुझे समझना होगा ।
जो राह हैं हटना होगा ।
वाजिब मजदूरी पाना होगा ।
अपने दम पर चलने वाला ।
समझ जा ओ स्वाभिमानी ।
मेहनत करता खाता है ।
बिन मेहनत नहीं पाता है ।
बिन मेहनत एक दिन न चलें ।
मेहनत नहीं आंसू बहाता है ।
तेरे जीवन का क्या होगा ।
क्या करुं मैं भविष्य वाणी ।
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