*जिला--------रायगढ़ (छ.ग.)
*विधा-------------राधेश्यामी छंद*
*मापनी-----------16 , 16*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
*भीगी पलकें सुना रही है,*
*एक अनकही मौन कहानी ।*
*काश प्यार की होती कीमत ,*
*तनमन लगती रूत सुहानी ।।*
जीवन गाथा हो पल-पल की ,
सुकुन भरी चाहत बाहों में।
साहस तो अब हो गये शुन्य ,
चलती कैसे इन राहों में ।
विरह व्यथा में जीवन कटती,
मीरा जैसी प्रेम दिवानी।
*भीगी पलकें सुना रही है,*
*एक अनकही मौन कहानी ।*
*काश प्यार की होती कीमत ,*
*तनमन लगती रूत सुहानी ।।*
साथ-साथ चलने की खाई,
कितने सारे कसमें वादें ।
जीवन में सदा नेह बरसे,
प्यार भरे हमारे इरादें ।
बयाँ करूँ कैसे इन सबको,
प्रेम प्यार की होय निशानी ।
*भीगी पलकें सुना रही है,*
*एक अनकही मौन कहानी ।*
*काश प्यार की होती कीमत ,*
*तनमन लगती रूत सुहानी ।।*
अनजानी रिश्तों में बँधते,
होते सारे बंधन प्यारी ।
राही हम सब एक राह के,
प्रेम पंथ में दुनियाँ सारी ।
भरती आहें जीवन पथ में,
करो नहीं अब तुम मनमानी ।
*भीगी पलकें सुना रही है,*
*एक अनकही मौन कहानी ।*
*काश प्यार की होती कीमत ,*
*तनमन लगती रूत सुहानी ।।*
No comments:
Post a Comment