Saturday, May 23, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से सुशीला साहू "विद्या" की रचना

*रचनाकार-----सुशीला साहू "विद्या"*
*जिला--------रायगढ़ (छ.ग.)
*विधा-------------राधेश्यामी छंद*
*मापनी-----------16 , 16*
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*भीगी पलकें सुना रही है,*
             *एक अनकही मौन कहानी ।*
*काश प्यार की होती कीमत ,*
            *तनमन लगती रूत सुहानी ।।*

जीवन गाथा हो पल-पल की ,
              सुकुन भरी चाहत बाहों में।
साहस तो अब हो गये शुन्य ,
                 चलती कैसे इन राहों में ।
विरह व्यथा में जीवन कटती,
                 मीरा जैसी प्रेम दिवानी।
*भीगी पलकें सुना रही है,*
             *एक अनकही मौन कहानी ।*
*काश प्यार की होती कीमत ,*
            *तनमन लगती रूत सुहानी ।।*

साथ-साथ चलने की खाई,
                 कितने सारे कसमें वादें ।
जीवन में सदा नेह बरसे,
                 प्यार भरे हमारे इरादें ।
बयाँ करूँ कैसे इन सबको,
              प्रेम प्यार की होय निशानी ।
*भीगी पलकें सुना रही है,*
             *एक अनकही मौन कहानी ।*
*काश प्यार की होती कीमत ,*
            *तनमन लगती रूत सुहानी ।।*

अनजानी रिश्तों में बँधते,
                     होते सारे बंधन प्यारी ।
राही हम सब एक राह के,
                   प्रेम पंथ में दुनियाँ सारी ।
भरती आहें जीवन पथ में,
              करो नहीं अब तुम मनमानी ।
*भीगी पलकें सुना रही है,*
             *एक अनकही मौन कहानी ।*
*काश प्यार की होती कीमत ,*
            *तनमन लगती रूत सुहानी ।।*


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