Monday, May 18, 2020

छत्तीसगढ़ के कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना-

रचनाकार-नलिनी
              बाजपेयी
जिला-कांकेर
विषय-वात्सल्य रस से 
             संबंधित रचना
दिनाँक  -18.05.20
  वार -सोमवार

मेरे घर-आँगन में एक नन्ही कली खिली,
      महक उठेगी बगिया मेरी
पाकर कुन्दकली।

कोमल,नाजुक,मासूम 
      सद्यस्नाता लगती भली,
नन्हें-नन्हें कदमों से 
      पायल की रुनझुन है बजी।

तुतली-तुतली बोली लगती है 
        मिश्री की डली,ओस की बूँदों ,
 चाँद की धवल चाँदनी से धूली
        ,सुमनों की बगिया में है पली।

  मेरा सदन सूना-सूना  था,                         
         भर गई खुशियां गली-गली।
नन्हीं बिटिया का रीझना
      ठुमक कर चलना लगी भली।

उसके स्मित अधर से खिल ,
          बनती कुटिया नई,
सुंदर-सुंदर नैना,
    बतरस लागे बैना बातें अनसुलझी।

तिमिर डूबी कुटिया में 
        लगती हीरक की कनी।
मेरे घर-आँगन में कली एक खिली,
      महक उठी मेरी बगिया मेरी 
पाकर कुन्दकली।

व्याख्या-नन्ही सी प्यारी सी बेटी के आगमन से माँ का मन प्रसन्न हो उठता है।उसके हाव-भाव,उसकी बोली  सब मन को मोहने वाली होती है।सूना घर भर 
उठता है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर( छ. ग.)

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