बाजपेयी
जिला-कांकेर
विषय-वात्सल्य रस से
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दिनाँक -18.05.20
वार -सोमवार
मेरे घर-आँगन में एक नन्ही कली खिली,
महक उठेगी बगिया मेरी
पाकर कुन्दकली।
कोमल,नाजुक,मासूम
सद्यस्नाता लगती भली,
नन्हें-नन्हें कदमों से
पायल की रुनझुन है बजी।
तुतली-तुतली बोली लगती है
मिश्री की डली,ओस की बूँदों ,
चाँद की धवल चाँदनी से धूली
,सुमनों की बगिया में है पली।
मेरा सदन सूना-सूना था,
भर गई खुशियां गली-गली।
नन्हीं बिटिया का रीझना
ठुमक कर चलना लगी भली।
उसके स्मित अधर से खिल ,
बनती कुटिया नई,
सुंदर-सुंदर नैना,
बतरस लागे बैना बातें अनसुलझी।
तिमिर डूबी कुटिया में
लगती हीरक की कनी।
मेरे घर-आँगन में कली एक खिली,
महक उठी मेरी बगिया मेरी
पाकर कुन्दकली।
व्याख्या-नन्ही सी प्यारी सी बेटी के आगमन से माँ का मन प्रसन्न हो उठता है।उसके हाव-भाव,उसकी बोली सब मन को मोहने वाली होती है।सूना घर भर
उठता है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर( छ. ग.)
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