जिला - महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक: "वरदान"......भ्रूण हत्या
विधा - कविता
दिनांक-18/05/2020
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अपनाएँ और गले लगाएँ,
आने वाला जो अंश तुम्हारा।
कुदरत का वरदान समझें,
स्वीकारें वह है वंश तुम्हारा।।
भाग्य से मिले नव कोपल,
कोंख में हरगिज़ नहीं मिटाएँ।
हो सकता है अद्भुत ज्ञानी,
वरदान समझ सहर्ष अपनाएँ।।
मोल कितना है जीवन में,
सब उनसे अनुभव ग्रहण करें।
तड़पते जो बेऔलाद हैं,
उनसे सीख लें अनुसरण करें।।
माता पिता की गोद भरती,
वात्सल्य रसपान सब करते।
जीवन में खुशियाँ भरती,
सुख देकर फिर दुर्भाग्य हरते।।
आने तो दो संसार में मुझे,
हँसने खेलने का हक दे दो माँ।
पिता की रहूँगी राजदुलारी,
भ्रूण हत्या से तृप्ति मिलेगी कहाँ।।
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