Saturday, May 16, 2020

छत्तीसगढ़ के कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- सजनी

रचना कार- नलिनी बाजपेयी
जिला - कांकेर
शीर्षक - *सजनी*
विधा -कविता(रति)
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  ~ ●• सजनी •● ~

रूप सुहाना चाल 
  गज गामिनी सजनी,
    शीतल मन्द बयार बीच 
      मधु रागिनी सजनी।        
  
काली कुंतल तिमिर भरी
  रात लगती सजनी,
    पूनम की धवलता मुख 
      उजास लगती सजनी।

स्वच्छ निरभ्र नभ भी 
  हताश लगती सजनी,
    नत नयन,मकरन्द झूमे,
      मंजुल आकार सजनी।

नयन तुम्हारे रत्नाकर की 
  अंगड़ाई सजनी,
    आनन,लोचन सब में भरी 
      अलसाई सजनी।

रतनारे होठों की जुम्बिश में 
  छिपी गहराई सजनी,
    उर-कपोत प्रेम डगर उड़ान
       का कर रहा विचार सजनी।

भोर की लालिमा सन्ध्या 
  की रोशनाई सजनी,
    कंपित भरा गात, झंकृत  
       राग की तरूणाई सजनी।

प्रीत निराला,सपन सलोना,
  मधु यामिनी शरमाई सजनी।
    विकल मन प्रीत नमन मेरा, 
       स्वीकार करो अब सजनी।

पावन प्रेम,सद्यस्नाता सा, 
  मुस्कान अधर खूब सजनी,
    तुम अगहनी धूप,मदमस्त है 
      रूप तुम्हारा सजनी।

एहसासे इश्क में सीप में जस 
  मोती स्वरूप तुम्हारा सजनी, 
    आकुल ह्रदय, प्रेम -रीत का 
       चलन अंगीकार करो सजनी।

रूप सुहाना, चाल गज 
  गामिनी सजनी,
    शीतल मन्द बयार बीच    
      मधु रागिनी सजनी।
   
     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर( छ. ग.)

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