Saturday, May 16, 2020

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से आनंद कुमार त्रिवेदी की रचना

रचनाकारः- आनंद कुमार त्रिवेदी 
              "आनंद"
जिला... रायगढ़
विधा....गीत (छत्तीसगढ़ी)
शीर्षक..."मया के ताज "
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अमर करे पियार हमर,
   एक महल बनाबो जी।
नई पाबो संगेमरमर,
  माटी के भीथी उठाबो जी।।
.......    ।......   ।.......

जमना नई हावय गाँव त,
   नरवा-झोरखी तीर सही।
ताज कस नई सकबो,
   त कच्चा झोपड़ी ही वो रही।।
डोली के धान लू के,2
      ओ म खदर छवाबो जी।
अमर करे.....

महल भीतर म झरना,
   मया-पियार के झरही जी।
नोनी अउ बाबू हमर,
   मन के ओ म तैरही जी।।
फोटो रही दूनों झन के,2
   अइसन टाटी धराबो जी।
अमर करे.....

अँगना म बिही-बोईर के,
    बिरथा ल लगाबो जी।
आमा डाही म एक,
    झूलवा घलो धराबो जी।।
गाँ भर के बाल गोपाल,2
  झूलवा म झूलाबो जी।
अमर करे....

घर के दीवार मया के,
   छापा ल छपवाबो जी।
मई दुआर म हमन,
 "पियार के घर "लिखवाबो जी।
मया के ताजमहल,2
        दुनिया ल देखाबो जी।
अमर करे....

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व्याख्या .....दू परेमी (नायक-नायिका) अपन के मया पिरीत ल अमर बनाय खातिर मिल के सज मढ़ात हाँवय।
ताजमहल कस तो नी बनाय सकें फेर ताज ले कम नी ए ऊँकर कलपना के घर।जेकर टाटी,दीवार, घर,अँगना जमो कति मया के कहर हर बगरत हवय।
   गाँव के परिवेस म जो संसाधन उपलब्ध हावय वही म लोग 
लईका गाँव परिवार संग रके दूनो परानी के बरोबर सहभागिता करत हावँय दूनों प्रेमी,गीत म इ भाव ल कहे के परयास किये गय हे।

                        _आनंद कुमार त्रिवेदी

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