Saturday, May 30, 2020

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर से ओमकार साहू"सर्द" की रचना- मजदूर

रचनाकार :- ओमकार साहू"सर्द"
जिला :- सूरजपुर, प्रेमनगर
विषय :- मजदूर 
विधा :- ग़ज़ल
बहर :- फऊलुन फऊलुन          फऊलुन फऊलुन
   122     122     122     122
काफिया :- हर
रदीफ़ :- का आरा
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चले थे बसाने, शहर का नज़ारा,
*बने कौन मेरे सफ़र का सहारा....*

गया आज भूखे सड़क में धकेला,
*सहूँ आज तेरे कहर का इशारा....*

बिलखते तड़पते  सड़क में चले थे,
*दिखाऊँ किसे मैं नज़र का नज़ारा....*

दिलाता रहा रोज़ झूठी दिलासा,
*अभी दूर थोड़ा शहर है हमारा....*

मगर जंग जीवन नहीं जीत पायी,
*मिला भूख को ना जहर का सहारा....*

चला "सर्द" छूटे अधूरे सफ़र में,
*बड़ा ना समझ ये उदर है हमारा....*

        ओमकार साहू "सर्द"
    प्रेमनगर, सूरजपुर, छ0ग0
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13 comments:

  1. Great👍, congratulation bhai sahab 🙏💐

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  2. समसामयिक घटना पर प्रहार करता प्रश्न

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  3. अतुल्नीय कार्य काबिले तारीफ भी कम है चूँकि एक ग्रामीण क्षेत्र, पहुँचविहीन होने के कारण भी शानदार काव्य संसद की रचना बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं आभार

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  4. बहुत बेहतरीन भैया जी आनंद से भर गया दिल.....बेहतरीन रचना👌👌👌👌👌💐💐💐💐

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    1. वाह्ह वाह वाह्ह सर्द भइया जी लाजावाब समसामायिक रचना भइया शानदार पंक्तियाँ 🙏🙏

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  5. बहुत ही अच्छा रचना सर जी।।।💐💐👌👌

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  6. वाकई में वर्तमान वास्तविकता से रूबरू कराता हुआ आपका यह गजल है सर जी

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  7. Marmasparshi rachna.majduro ki wartman paristhiti ka anukarniy chitran.

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  8. Great bhaiya... U r always Adorable ...

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  9. बेहतरीन रचना

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  10. बहुत सुंदर सर जी,

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  11. बहुत अच्छी रचना है,महोदय...

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  12. बहुत सुन्दर सर

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