Wednesday, April 15, 2020

छत्तीसगढ़ से रश्मि विपिन अग्निहोत्री की रचना- तुम जीवित हो

कवयित्री- रश्मि विपिन अग्निहोत्री
राज्य - छत्तीसगढ़
शीर्षक - तुम जीवित हो,,,,,,, 

मुद्दतों से ,,,,,
खुद का पता न था, 
आज फुर्सत में 
खुद से मुलाक़ात हो गई । 
आरज़ू थी,,,,, 
खुदी से खुद का हाल पूछूँ
कोशिश की तो, 
नैनों से बरसात हो गई। 
बहुत खूब,,,,, 
परख थी ज़माने की, 
और खुद की कोई
खुद को खबर न थी, 
वल्लाह ये क्या बात हो गई। 
मैनें पूछा,,,,, 
सखि कैसी हो? 
बहती अश्रुधारा से, 
वो टपक कर हाथों में
श्वेत गुलाब हो गई । 
आह उठी,,,,, 
कभी तप्त कभी शीत
पूछा मैनें होठों को भींच
उससे पूछ लिया, 
क्यूँ इस कदर आहें भर रही 
उसने मेरे हृदय पर 
हाथ रख कहा अरे! 
तुम जीवित हो ,,,,,
बस यही बताने की 
' रश्मि 'कोशिश कर रही ।। 

✍रश्मि विपिन अग्निहोत्री
      केशकाल जिला कोण्डा़गांव

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