पता........भाटापारा छ.ग.
जिला......बलौदाबाजार भाटापारा
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विषय............. गीत लेखन
विधा...............राधेश्यामी छंद
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ध्रुवपंक्ति ----
*संबंधों के बंध न छूटे ,*
*आओ कुछ पल संवाद करें ।*
*कुछ भूल चलें , कुछ याद करें ।।*
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आधार छंद - मत्त सवैया / राधेश्यामी छंद
16,16 पदांत एक गुरु अनिवार्य
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दीन हीन की पूजन कर लो,
आन मान का ताज पहन लो ।
सार भाव का ध्यान भरो तुम,
मातृ भूमि का गान करो नित ।
मात पिता का साथ न छूटे,
शुभ मंगल की भाव न रूठे ।
*संबंधों के बंध न छूटे ,*
प्रेम प्रीत की आस न टूटे ।
*आओ कुछ पल संवाद करें ।*
भावों का नित सम्मान करें।
निज मान धरे , सद काम करें।
*कुछ भूल चलें , कुछ याद करें।।*
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प्रेम भाष की बोल सीख कर,
मात भारती ज्ञान पाठ कर।
मधुर सुधा रस प्रीत भाव भर,
पावन जग धरती भवसागर।
मन मोहन का साथ न छूटे,
मुझसे गिरधर कभी न रूठे।
*संबंधों के बंध न छूटे ,*
प्रेम प्रीत की आस न टूटे।
*आओ कुछ पल संवाद करें ।*
भावों का नित सम्मान करें।
निज मान धरे , सद काम करें।
*कुछ भूल चलें , कुछ याद करें।।*
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