Wednesday, April 15, 2020

दिल्ली से तालिब मंसूरी की रचना- दर्द

तालिब मंसूरी 
दिल्ली 
शीर्षक -दर्द 
7860247454




दर्द इतने हैं ज़ख़्म दिखाऊँ कैसे,
बहुत हूँ परेशां हाल सुनाऊँ कैसे।

लोग पूछते हैं खैरियत जब मेरी,
सोंचता हूँ ये उनको बताऊँ कैसे।

निकलते रहते हैं अक़्सर आँसू मेरे
चेहरे से इनको अब  छुपाऊँ कैसे।

गली से गुजरते है वो ख़ामोशी से,
डर लगता है मैं उन्हें बुलाऊँ कैसे।

लोग कहते हैं तुम गुमसुम रहते हो,
बताओ "तालिब"मैं मुस्कराऊँ कैसे।

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