राज्य- मध्य प्रदेश
कविता का शीर्षक- "नहीं है पता ..!"
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कविता-
वो क्या है सुकून जो है दिल ढूँढता
वो राहें कहाँ हैं नहीं है पता,
हैं ख़ामोश लम्हे और तन्हा सी रातें
वो बातें कहाँ हैं नहीं है पता,
सबक एक है वो कुरॉं हो या गीता
किताबें अलग क्यों नहीं है पता,
तू भी लेता साँसें मैं भी साँस लेता
दोनों की रगों में लहू एक सा,
क्यों होती है जंग फिर भी दरमियाँ
ना तू जानता है ना मुझको पता,
तू करता ख़ुदा, मैं ईश्वर को जपता
हैं दोनों कहाँ ना किसी को पता,
फिर भी क्यों है बैर नहीं है पता
क्यों दोनों के ज़ेह्न से इंसान लापता,
है मुल्क भी एक, एक है सभ्यता
फिर सरहद है क्यों, नहीं है पता...
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