राजस्थान
राहगीर की कलम से
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*राहगीर की कलम से*
कब तक तू यूं ही ख्वाब देखते रहेगा
उन ख्वाब को पूरा करने की कोशिश तो कर
बंद आंखों के ख्वाब बस ख्वाब ही रह जाते हैं
तू आंखें खोल कर उसे देखने की कोशिश तो कर
चल उठ कदम बढ़ा, रास्ता भी दिखेगा
तू उदय हैं,अस्त नहीं रास्ता ढूंढने की कोशिश तो कर
हे क्या हुआ जो तू रास्ता भटक गया
हे क्या हुआ जो घना अंधेरा छाया है
हे रात हुई है, सुबह भी होगी
अंधेरा लुप्त, रोशनी भी दिखेगी
एक रास्ते बंद हुए हैं तो कई रास्ते खुल जाएंगे
अंधेरों से तू न घबरा साहस हिम्मत दिखा
कदम बढ़ा कर उन रास्तों पर चलने की कोशिश तो कर
हे गिर कर तू यूं ना बैठ
हे थककर तू यूं ना बैठ
हे राहगीर भीड़ बहुत है इन राहों में
सब पीछे छोड़ जाएंगे
चल उठ कदम बढ़ा हिम्मत दिखा
इन भीड़ से आगे निकलने की तू कोशिश तो कर
अपने ख्वाब को ख्वाब नहीं
हकीकत में जीने की ख्वाहिश तो रख
हिम्मत साहस और निष्ठा से,
तू उसे पूरा करने की कोशिश तो कर
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