Wednesday, April 15, 2020

छत्तीसगढ़ से तारा पांडेय"मुक्तांशा" की रचना- कोरोना

नाम_तारा पांडेय"मुक्तांशा"
राज्य_छत्तीसगढ़
शीर्षक_कैसा ये कोरोना का शोर है?


कैसा ये कोरोना का शोर है?

कैसा ये कोरोना का शोर है?
हाहाकार मच रहा, चहुं ओर है
इस भयंकर, वैश्विक महामारी से
बच नहीं रहा कोई छोर है
न जाने कैसे सम्हलेंगे हालात
किनके हांथों में उसकी डोर है?
छोटा है  पर इतना आक्रामक
कि चल न पा रहा किसी का जोर है
खोज में लगे हैं,, क्या इसका तोड़ है
घर में रह कर तोड़ना है कड़ी
जो कोरोनावायरस का बेजोड़ है
घर बैठे हराएंगे, जनता चाहे बोर है
कैसा ये कोरोना का शोर है?

9 comments:

  1. बहुत सुंदर पंक्तिया भाभी जी

    ReplyDelete
  2. Bahut hi sundar kavita mem👌👌👌👍👍

    ReplyDelete
  3. 👌👌👌👌👌👌🙏👍

    ReplyDelete
  4. आज़ कल तो कोरोना ही छाया है।
    होंगे इससे मुक्त ये आशा है मुक्तांशा।।

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी, बिल्कुल दूर होगी निराशा
      यही चाहती है "मुक्तांशा"

      Delete
  5. Bahut sundar kavita hai jo,, 💐💐💐

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...