Monday, April 13, 2020

राजस्थान से बजरंग लाल सैनी वज्रघन की गगनांगना छंद में रचना

नाम बजरंग लाल सैनी वज्रघन
राज्य राजस्थान
विधा-छंद (गगनांगना छंद) 
मात्रा भार 16-9=25
अंत में रगण (SIS) अनिवार्य
विषय - *कृष्ण जन्म*
संपर्क 8769764786 

          *कृष्ण जन्म*

भाद्रपद कृष्ण तिथि शुभाष्टमी, शुभ नख रोहिणी।
सुर असुर ऋषि देखने आये, छवि मनमोहिनी।। 1

प्रशांत व्योम में हलचल मची, चमकत दामिनी।
झंझा मेघ गर्जन वृष्टि से, भीषण यामिनी।। 2

हुए विकल वसुदेव देखकर, तड़पन भामिनी।
शुभ पल आया जब गूंज उठी,किलकन रागिनी।3

निज सुत मुख लख नंदभामिनी, नेह उतावली।
सुख में मग्न हो प्रसव पीड़ा, भूली बावली।। 4

क्या दिव्य रूप उस बालक का, मन में राखिए।
अद्भुत शंख चक्र गदा कमल, कर में धारिए।। 5

सुंदर श्यामल तन पीताम्बर, अनुपम देह है।
वसुदेव देवकी नयनों में, छलकत नेह है।। 6

चंद्रमुख भूषण सुशोभित तन, छवि अभिराम है।
मात-पिता नयनों से बहता, जल अविराम है।। 7

रोम-रोम में परम आनंद, निज सुखधाम है।
नारायण-दर्शन से बनते, समस्त काम है। 8

*बजरंग लाल सैनी वज्रघन*

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