-राज्य- उ०प्र०
-शीर्षक-माँ कहाँ है
(माँ कहाँ है )
कहाँ बसा भगवान कहाँ बसती है दुनिया।
रोते रोते पूछ रही है,एक छोटी सी मुनिया।
कहते सब माता जिसको वो कहाँ मिलती है?
क्या कहीं परियों के देश में मेरी माँ भी बसती है?
क्यों नही देखा है मैने ,अपनी माता प्यारी को।
क्यों लिया है छीनविधाता ने ,पूनम की उजियारी को।
या बना दिया है उसे नन्ही सी गुडि़या ।।
रोते -रोते पूछ रही,एक छोटी सी मुनिया ।।
सबकी माता गले लगाती ,प्रीत से भर अंक में।
क्यों रहती सबकी माता ,सबके संग में।
मुझे भी माँ से मिलना है संग मात के रहना है।
मै भी छोटी हूँ ,क्यों भगवान ने माँ को छीना है।
आओ भगवन सामने ,है विरान मेरी भी दुनिया ।
रोते रोते पूछ रही एक छोटी सी मुनिया ।।
सोती हूँ अकेले मै,माता का आँचल नही।
न करूँ मै जिद ,पास ममता का बादल नही।
राजू राधा सब बच्चे लगते,बडी़ मै हुई कैसे।
रूप लेते वयस्क का ,माँ बिन क्या बच्चे होते ऐसे।
भेजो भगवन माँ को मेरी,बुलाती है उसकी मुनिया ।।
रोते रोते पूछ रही छोटी सी मुनिया।।
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