Tuesday, April 21, 2020

छत्तीसगढ़ से यूरेका योगी की रचना- मेरी अभिलाषा

नाम - यूरेका योगी 
राज्य - छत्तीसगढ़ 
शीर्षक - मेरी अभिलाषा

 मेरी अभिलाषा
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बनकर पंछी उन्मुक्त गगन में,
पंख फैलाये उड़ जाऊं मैं,
नीले अंबर और भरी उमंग में ,
उड़ते - उड़ते गाऊं मैं।
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करने को अपना सपना पूरा,
अनंत सागर को पार‌ लगाऊं मैं,
कर दिखाऊं असंभव को संभव,
ऐसी आत्मबल पाऊं मै।
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बनाने को खुद अपनी पहचान,
हर लम्हा बढ़ती जाऊं मैं,
सफलता भी मेरे पीछे आये,
ऐसी उड़ान भर पाऊं मैं।
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लिखवाने को नाम इतिहास के पन्नों में,
रात‌ - दिन एक कर जाऊं मैं,
नाम न बताना पड़े किसी को,
ऐसी कामयाबी को पाऊं मैं।
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छा जाऊं इस कदर लोगों के दिलों में,
कि सारी दुनिया मोहताज हो मेरी,
पलक झपकते ही सारे जहांन को,
हंसते - हंसते घुम आऊं मैं।

         - यूरेका योगी -
टेंगना बरपारा , बालोद , छ. ग .

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